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कलकत्ता
पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के मंच पर इस बार ऐतिहासिक राजनीतिक बदलाव देखने को मिल रहा है. राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद पूजा पंडालों से तृणमूल कांग्रेस का प्रभाव घटता नजर आ रहा है, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने अपनी सामाजिक और राजनीतिक उपस्थिति बेहद मजबूत कर ली है. पिछले वर्षों में हजारों पंडालों का उद्घाटन करने वाली पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस बार केवल अपने आवास के पास एक पंडाल तक सीमित रहीं. वहीं मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, दिलीप घोष, समिक भट्टाचार्य और सुकांत मजूमदार समेत भाजपा के शीर्ष नेताओं ने श्रीभूमि और मोहम्मद अली पार्क जैसे प्रमुख आयोजनों की बागडोर अपने हाथों में ले ली है।
पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन के साथ राजनीतिक संपर्क का भी अहम मंच रही है. पूजा समितियों के आयोजनों में नेताओं की मौजूदगी और पंडालों के उद्घाटन लंबे समय से राज्य की राजनीति का हिस्सा रहे हैं. इस बार पूजा पंडालों में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेताओं की सक्रियता और तृणमूल कांग्रेस के कई प्रमुख चेहरों की गैर-मौजूदगी चर्चा में है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी समेत बीजेपी के कई नेता अलग-अलग पूजा आयोजनों में शामिल हुए. वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल के कुछ वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी पहले के मुकाबले सीमित रही. बड़े पूजा आयोजनों से जुड़े राजनीतिक चेहरों में आए इस बदलाव को राज्य के बदले सत्ता समीकरणों के संदर्भ में देखा जा रहा है।
पिछले करीब डेढ़ दशक में ममता बनर्जी का दुर्गा पूजा पंडालों का उद्घाटन करना कोलकाता के उत्सव से पहले की प्रमुख राजनीतिक गतिविधियों में शामिल रहा है. नवरात्रि से पहले वह कई पूजा समितियों के कार्यक्रमों में हिस्सा लेती थीं. 2025 में भी उनके पूजा उद्घाटनों का कार्यक्रम काफी व्यस्त रहा था. इस बार उनकी सार्वजनिक गतिविधियां पहले के मुकाबले सीमित दिखाई दीं. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, ममता बनर्जी ने कालीघाट स्थित अपने आवास के आसपास एक पूजा पंडाल का उद्घाटन किया. पिछले साल के कार्यक्रमों से इसकी तुलना करने पर उनकी मौजूदगी में अंतर नजर आता है।
कोलकाता के कई बड़े पूजा आयोजनों के साथ तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का लंबे समय से जुड़ाव रहा है. पूर्व मंत्री अरूप विश्वास, सुजीत बोस और फिरहाद हकीम अपने-अपने क्षेत्रों की प्रमुख पूजा समितियों से जुड़े रहे हैं. इस बार इन आयोजनों में उनकी भूमिका और मौजूदगी को लेकर चर्चा हुई. विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के सामने संगठन को फिर से मजबूत करने की चुनौती है. ऐसे में सार्वजनिक आयोजनों में पार्टी नेताओं की मौजूदगी भी राजनीतिक नजरिए से देखी जा रही है. कोलकाता के चर्चित पूजा आयोजनों में नाकतला उदयन संघ का नाम शामिल है. इस आयोजन के साथ पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी का जुड़ाव रहा है. शिक्षक भर्ती घोटाले से जुड़े मामले में कानूनी कार्रवाई का सामना कर चुके पार्थ चटर्जी इस बार पूजा आयोजन से दूर रहे।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी इस बार कई दुर्गा पूजा आयोजनों में शामिल हुए. उन्होंने कोलकाता के अलावा राज्य के दूसरे हिस्सों में भी पूजा पंडालों का दौरा किया और उद्घाटन कार्यक्रमों में हिस्सा लिया. इन आयोजनों में श्रीभूमि स्पोर्टिंग क्लब की पूजा खास चर्चा में रही. यह पूजा लंबे समय से सुजीत बोस से जुड़ी रही है. पिछले साल इसका उद्घाटन ममता बनर्जी ने किया था. इस बार शुभेंदु अधिकारी की मौजूदगी को सत्ता परिवर्तन के बाद बदले राजनीतिक समीकरणों के उदाहरण के तौर पर देखा गया. बीजेपी के लिए ऐसे आयोजन स्थानीय संगठनों और आम लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने का अवसर भी हैं।
पूजा के दौरान बीजेपी के कई अन्य नेता भी विभिन्न आयोजनों में शामिल हुए. इनमें पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष, प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य, केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार और पार्टी की नेता लॉकेट चटर्जी तथा अग्निमित्रा पॉल शामिल हैं. इन नेताओं की सक्रियता से पार्टी को धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के जरिए स्थानीय स्तर पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने का अवसर मिला. विपक्ष में रहते हुए बीजेपी के नेता तृणमूल कांग्रेस पर पूजा आयोजनों में राजनीतिक प्रभाव रखने के आरोप लगाते रहे थे. अब सत्ता में आने के बाद पार्टी के नेताओं की इन आयोजनों में भागीदारी को नए राजनीतिक संदर्भ में देखा जा रहा है।
उत्तर कोलकाता के अहीरीटोला सार्वजनिक दुर्गोत्सव में इस बार बीजेपी विधायक पूर्णिमा चक्रवर्ती ने मां दुर्गा की प्रतिमा के नेत्र बनाने की पारंपरिक रस्म चक्षुदान में हिस्सा लिया. पिछले वर्षों में यह रस्म तृणमूल कांग्रेस की पूर्व मंत्री शशि पांजा निभाती रही थीं. इसी तरह मध्य कोलकाता के मोहम्मद अली पार्क की पूजा में भी राजनीतिक चेहरों को लेकर बदलाव चर्चा में रहा. इस बार बीजेपी सरकार के मंत्री तापस रॉय ने पंडाल का उद्घाटन किया. वहीं, तृणमूल कांग्रेस के सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय की भूमिका को लेकर सवाल उठे।
बीजेपी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य राहुल सिन्हा ने मौजूदा स्थिति की तुलना ऐसे खेल से की जिसमें गोलपोस्ट के सामने कोई प्रतिद्वंद्वी नहीं है. उन्होंने कहा कि इस बार दुर्गा पूजा के दौरान पार्टी को अपनी सामाजिक और सांस्कृतिक मौजूदगी दर्ज कराने में खास राजनीतिक चुनौती नहीं दिख रही है. राहुल सिन्हा ने तृणमूल के कुछ नेताओं पर पूजा के नाम पर जबरन चंदा वसूलने का आरोप भी लगाया. दूसरी ओर, बीजेपी नेता और राज्य सरकार के मंत्री इंद्रनील खान ने पूजा पंडालों पर राजनीतिक कब्जे के आरोपों को खारिज किया. उन्होंने कहा कि दुर्गा पूजा बंगाल के लोगों का उत्सव है और किसी एक राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं है. उनके मुताबिक, बीजेपी नेता इन आयोजनों में हिस्सा लेने के लिए आ रहे हैं।









