Home अध्यात्म हरतालिका तीज आज, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, व्रत विधि और सुहाग...

हरतालिका तीज आज, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, व्रत विधि और सुहाग की चीजों का महत्व

16
0
Jeevan Ayurveda

anjanikhabar:

हरतालिका तीज को सुहाग और दांपत्य सुख से जुड़े प्रमुख व्रतों में गिना जाता है. मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी. उसी तप और संकल्प की स्मृति में हरतालिका तीज का व्रत रखा जाता है. विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से व्रत रखती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं मनचाहा वर पाने की इच्छा से यह व्रत करती हैं.

Ad

आज ही मनाई जा रही है हरतालिका तीज
इस साल हरतालिका तीज 14 सितंबर 2026, सोमवार को मनाई जा रही है. यह व्रत भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है. इस बार तृतीया तिथि 13 सितंबर सुबह शुरू होकर 14 सितंबर सुबह समाप्त हो रही है, इसलिए उदया तिथि के आधार पर 14 सितंबर को व्रत रखा जा रहा है.

पूजा का शुभ मुहूर्त
नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार हरतालिका तीज पर प्रातःकालीन पूजा का मुहूर्त सुबह 6:05 बजे से 7:06 बजे तक रहेगा. क्षेत्र और स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में अंतर हो सकता है.

इस दिन शाम के प्रदोष काल में भी शिव-पार्वती की पूजा करने की परंपरा कई स्थानों पर है. इसलिए अपने शहर के पंचांग के अनुसार स्थानीय समय जरूर देख लें.

त्रेता युग से कैसे जुड़ी है तीज?
पौराणिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी. उनके पिता हिमालय भगवान विष्णु से उनका विवाह करना चाहते थे, लेकिन पार्वती की इच्छा भगवान शिव को पति के रूप में पाने की थी.

कहा जाता है कि माता पार्वती की सखी उन्हें वन में ले गईं, जहां उन्होंने शिव की आराधना करते हुए कठोर व्रत किया. उन्होंने मिट्टी से शिवलिंग बनाकर पूजा की और भगवान शिव को पति रूप में पाने का संकल्प लिया. उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया.  इसी कथा को हरतालिका तीज के व्रत से जोड़ा जाता है.

पूजा में शिव-पार्वती के साथ गणेश जी की करें आराधना
हरतालिका तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा मुख्य रूप से की जाती है. इसके साथ गणेश जी की पूजा करने की भी परंपरा है.

पूजा के लिए मिट्टी या बालू से शिव-पार्वती की प्रतिमा या शिवलिंग बनाकर स्थापित किया जा सकता है. इसके बाद जल, पंचामृत, अक्षत, रोली, चंदन, फूल, बेलपत्र, धूप और दीप अर्पित करें. माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित कर तीज व्रत की कथा सुनें.

इसके बाद शिव-पार्वती की आरती करें, परिवार के सुख-समृद्धि की कामना करें.

हरतालिका तीज पर क्या दान करें?
इस दिन दान-पुण्य को भी शुभ माना जाता है. अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को वस्त्र, अन्न, फल, मिठाई और सुहाग सामग्री का दान किया जा सकता है.

विवाहित महिलाएं किसी जरूरतमंद महिला को साड़ी, चूड़ी, सिंदूर, बिंदी, मेहंदी या अन्य श्रृंगार सामग्री दे सकती हैं. वहीं अन्न या फल का दान भी किया जा सकता है. दान करते समय दिखावे के बजाय श्रद्धा और सामर्थ्य को प्राथमिकता देना बेहतर माना जाता है.

सुहाग की इन चीजों का भी है महत्व
हरतालिका तीज पर महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं.  इसमें सिंदूर, बिंदी, चूड़ी, मेहंदी, मंगलसूत्र, पायल आदि को सुहाग के प्रतीक के रूप में देखा जाता है.

पूजा के दौरान माता पार्वती को भी सुहाग की सामग्री अर्पित करने की परंपरा है. मान्यता है कि इससे अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना की जाती है.

निर्जला व्रत में रखें अपनी सेहत का ध्यान
हरतालिका तीज पर कई महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं यानी पूरे दिन अन्न और जल का सेवन नहीं करतीं. हालांकि यह कठिन व्रत है और हर व्यक्ति की शारीरिक क्षमता अलग होती है.

अगर किसी को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी है, गर्भावस्था है, दवा चल रही है या डॉक्टर ने लंबे समय तक भूखे-प्यासे रहने से मना किया है, तो निर्जला व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है.  धार्मिक आस्था के साथ स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी महत्वपूर्ण है.

रात में जागरण और अगले दिन पारण
कई परंपराओं में हरतालिका तीज की रात जागरण कर शिव-पार्वती की पूजा, भजन और व्रत कथा का पाठ किया जाता है. अगले दिन स्नान और पूजा के बाद व्रत का पारण किया जाता है. अलग-अलग क्षेत्रों में पारण और पूजा की विधि में थोड़ा अंतर हो सकता है.

हरतालिका तीज का संदेश
हरतालिका तीज की कथा में संकल्प, तपस्या और आस्था को विशेष महत्व दिया गया है. इसलिए इस पर्व का उद्देश्य केवल व्रत रखना नहीं, बल्कि शिव-पार्वती के प्रति श्रद्धा और उनके दांपत्य जीवन से जुड़े आदर्शों को याद करना भी माना जाता है.

Jeevan Ayurveda Clinic

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here