Home मध्य प्रदेश स्वतंत्रता की अक्षुण्णता बनाए रखने की जिम्मेदारी युवा पीढ़ी पर : मंत्री...

स्वतंत्रता की अक्षुण्णता बनाए रखने की जिम्मेदारी युवा पीढ़ी पर : मंत्री परमार

14
0
Jeevan Ayurveda

anjanikhabar:

भोपाल 

Ad

उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने कहा कि हमें स्वतंत्रता बड़े संघर्ष, त्याग और बलिदानों के बाद प्राप्त हुई है। इसकी अक्षुण्णता बनाए रखने और राष्ट्र की प्रगति को निरंतर आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी युवा पीढ़ी पर है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए भारतीय दृष्टि से आगे बढ़ने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया है। वर्ष 2047 के संकल्पित विकसित भारत के निर्माण में हम सभी को मिलकर अपना योगदान देना है। इसके लिए युवाओं का अपनी जिज्ञासाओं का समाधान करना और ज्ञान के प्रति निरंतर जिज्ञासु बने रहना आवश्यक है। हमारे पूर्वजों के ज्ञान और अनुभव के आधार पर भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने की दिशा में आगे बढ़ना है। स्व का जागरण ही राष्ट्र जागरण का प्रथम सोपान है।

मंत्री  परमार ने यह विचार मंगलवार को भोपाल स्थित आईईएस विश्वविद्यालय में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, आईईएस विश्वविद्यालय एवं दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित छात्र-संवाद कार्यक्रम ‘आरोहण-स्व से राष्ट्र की ओर’ में व्यक्त किए। कार्यक्रम में परम पूज्य आचार्य  मिथिलेश नंदिनी शरण महाराज का सान्निध्य प्राप्त हुआ।

मंत्री  परमार ने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा केवल ज्ञान अर्जित करने की परम्परा नहीं, बल्कि व्यक्ति के समग्र निर्माण और उसके ज्ञान, सामर्थ्य एवं ऊर्जा को राष्ट्रहित से जोड़ने की जीवनदृष्टि है। युवा शक्ति के विचार, ऊर्जा और संकल्प को राष्ट्र निर्माण की दिशा देना ही विकसित भारत के संकल्प की सशक्त आधारशिला है।

विद्यार्थियों ने रखीं जिज्ञासाएं, आचार्य  एवं मंत्री  परमार ने दिए उत्तर

कार्यक्रम में विभिन्न संस्थानों से आए विद्यार्थियों ने शिक्षा, भारतीय ज्ञान परम्परा, राष्ट्र निर्माण, युवा दायित्व, व्यक्तित्व विकास सहित विविध विषयों से जुड़ी अपनी जिज्ञासाएं एवं प्रश्न रखे। परम पूज्य आचार्य  मिथिलेश नंदिनी शरण महाराज एवं मंत्री  परमार ने विद्यार्थियों के प्रश्नों का आत्मीयता के साथ समाधान करते हुए उनके जिज्ञासाओं के उत्तर दिए। संवाद के दौरान विद्यार्थियों को अपने प्रश्नों पर चिंतन करने, भारतीय दृष्टि से विषयों को समझने तथा अपनी प्रतिभा एवं ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में लगाने की प्रेरणा मिली।

‘स्व’ के जागरण से ही राष्ट्र निर्माण की यात्रा

परम पूज्य आचार्य  मिथिलेश नंदिनी शरण महाराज ने व्यक्ति निर्माण की यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब ‘स्व’ स्वस्थ और सशक्त होगा, तभी राष्ट्र निर्माण की यात्रा भी सुदृढ़ होगी। उन्होंने भारतीय गुरुकुल परम्परा का उल्लेख करते हुए कहा कि उस कालखंड में शिक्षा का उद्देश्य केवल विषयों का ज्ञान प्राप्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थी को जीवन के प्रश्नों का समाधान स्वयं खोजने योग्य बनाना था। दीक्षांत के पश्चात विद्यार्थी अपने प्रश्नों का स्वयं समाधान खोजते हुए अपने जीवन की जिम्मेदारियों का निर्वहन करते थे और यहीं से उनकी ‘स्व से राष्ट्र की ओर’ यात्रा प्रारंभ होती थी। उन्होंने विद्यार्थियों को आत्मचिंतन, चरित्र निर्माण, कर्तव्यबोध और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को समझने का आह्वान किया। उनके प्रेरणादायी संवाद ने विद्यार्थियों को अपने सामर्थ्य को पहचानकर उसे समाज एवं राष्ट्र के हित में लगाने की नई दृष्टि प्रदान की।

कार्यक्रम में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी, मध्यप्रदेश हिंदी ग्रंथ अकादमी के निदेशक  अशोक कड़ेल, मध्यप्रदेश प्रवेश एवं शुल्क विनियामक समिति के पूर्व अध्यक्ष एवं शिक्षाविद् डॉ. रविंद्र कान्हेरे, महर्षि संस्कृत विश्वविद्यालय, कैथल, हरियाणा के पूर्व कुलपति डॉ. रमेश चंद्र भारद्वाज, मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष डॉ. खेम सिंह डेहरिया, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलगुरु  विजय मनोहर तिवारी, दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान के संचालक डॉ. मुकेश मिश्रा, न्यास के प्रांत संयोजक डॉ. भरत व्यास, सह-संयोजक डॉ. अभय गुप्ता, भोपाल संभाग संयोजक  अनीत राय एवं आईईएस विश्वविद्यालय के कुलाधिपति  बादाम सिंह यादव सहित विश्वविद्यालय के पदाधिकारीगण एवं विभिन्न संस्थानों से बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।

 

Jeevan Ayurveda Clinic

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here