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युवा अपनी जिज्ञासा, परिश्रम और नवाचार से विकसित भारत की दिशा तय करेंगे : मंत्री परमार

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anjanikhabar:

भोपाल 

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उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने कहा कि युवा देश की सबसे बड़ी शक्ति और संपदा हैं। उनकी जिज्ञासा, ज्ञान, परिश्रम, अनुसंधान एवं नवाचार की क्षमता ही भारत को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी। वर्ष 2047 में जब भारत अपनी स्वतंत्रता की शताब्दी पूर्ण करेगा, तब भारत कैसा होगा, यह आज की युवा पीढ़ी के ज्ञान, परिश्रम और संकल्प से तय होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। मंत्री  परमार मंगलवार को भोपाल स्थित रविन्द्र भवन के हंसध्वनि सभागृह में भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी) भोपाल में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए आयोजित अभिमुखीकरण समारोह-2026 ‘दीक्षारंभ’ के उद्घाटन सत्र में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने आईआईआईटी भोपाल में चयनित सभी नवप्रवेशित विद्यार्थियों को बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

जिज्ञासा को अनुसंधान और समाधान से जोड़ें

मंत्री  परमार ने विद्यार्थियों से कहा कि उनके मन में निरंतर जिज्ञासा बनी रहनी चाहिए। जिज्ञासा ही ज्ञान की पहली सीढ़ी है और ज्ञान को अनुसंधान एवं नवाचार से जोड़कर ही देश की समस्याओं के प्रभावी समाधान खोजे जा सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे केवल ज्ञान अर्जित करने तक सीमित न रहें, बल्कि अपनी प्रतिभा और तकनीकी दक्षता का उपयोग समाज एवं राष्ट्र के विकास के लिए करें।

मंत्री  परमार ने कहा कि तकनीक तेजी से बदल रही है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आने वाले समय में शिक्षा, रोजगार, उद्योग और समाज के अनेक क्षेत्रों को प्रभावित करेगी। विद्यार्थियों को इन परिवर्तनों को समझते हुए तकनीकी ज्ञान एवं नवाचार के क्षेत्र में स्वयं को निरंतर तैयार करना होगा। आईआईआईटी भोपाल विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक, अनुसंधान और नवाचार का उत्कृष्ट अनुभव प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

2047 का भारत आज की युवा पीढ़ी तय करेगी

मंत्री  परमार ने कहा कि स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूर्ण होने पर वर्ष 2047 में भारत एक विकसित राष्ट्र के रूप में विश्व के सामने खड़ा हो – इसके लिए आज से ही मजबूत आधार तैयार करना होगा। आज की युवा पीढ़ी ही 2047 के भारत का निर्माण करेगी। राष्ट्र निर्माण के लिए केवल प्रतिभा ही नहीं, बल्कि परिश्रम, अनुशासन, जिम्मेदारी, संस्कार और कर्तव्यबोध भी आवश्यक हैं।

मंत्री  परमार ने विद्यार्थियों से कहा कि वे ऐसे नागरिक बनें, जिनके ज्ञान और आचरण से देश का सम्मान बढ़े। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में विश्व पटल पर भारत का सम्मान और प्रतिष्ठा और अधिक बढ़े, इसकी जिम्मेदारी युवा पीढ़ी के कंधों पर है। विद्यार्थियों का प्रत्येक सकारात्मक प्रयास राष्ट्र की प्रगति में योगदान देगा।

भाषाएं जोड़ने का माध्यम हैं, तोड़ने का नहीं

मंत्री  परमार ने भाषा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भाषा लोगों को जोड़ने का माध्यम है, तोड़ने का नहीं। भारत की भाषाई विविधता हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत है। उन्होंने विद्यार्थियों को विभिन्न भारतीय भाषाएं सीखने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में आने वाले समय में विभिन्न भाषाओं के अध्ययन और शिक्षण को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे विद्यार्थी देश की विविध भाषाई एवं सांस्कृतिक परंपराओं से परिचित हो सकें। इस अनुक्रम में प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में विविध भारतीय भाषाओं को क्रेडिट से जोड़कर सिखाने की कार्ययोजना पर कार्य हो रहा है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप शिक्षा को ज्ञान, कौशल, अनुसंधान, नवाचार और भारतीय भाषाओं से जोड़ते हुए विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है।

समारोह में भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, भोपाल के निदेशक प्रो. आशुतोष कुमार सिंह, मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, भोपाल के निदेशक प्रो. के.के. शुक्ला एवं भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, भोपाल की अनुसंधान एवं विकास प्रभारी डॉ. नेहा सिंह सहित संस्थान के अधिकारी, शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में नवप्रवेशित विद्यार्थी उपस्थित थे।

 

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