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रक्षाबंधन पर सबसे पहले महाकाल को बांधी राखी, भस्म आरती में निभाई गई अनोखी परंपरा

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anjanikhabar:

उज्जैन 

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रक्षाबंधन के पावन पर्व पर कालों के काल बाबा महाकाल के दरबार में अद्भुत और अलौकिक दृश्य देखने को मिला। सनातन परंपरा के अनुसार सभी त्योहारों की शुरुआत महाकाल की नगरी से ही होती है। इसी कड़ी में आज श्रावण पूर्णिमा के अंतिम दिन तड़के 3 बजे होने वाली भस्म आरती के दौरान सबसे पहले बाबा महाकाल को रक्षासूत्र (राखी) बांधी गई। मान्यता है कि सृष्टि में पहला रक्षासूत्र बाबा महाकाल को ही अर्पित किया जाता है और जिन बहनों का कोई भाई नहीं होता, वे महाकाल को ही अपना भ्राता मानकर रक्षाबंधन मनाती हैं।

इस बार बाबा महाकाल को विशेष रूप से तैयार की गई 6 आकर्षक राखियां अर्पित की गईं। पुजारी परिवार की ओर से रागिनी शर्मा द्वारा बनाई गई 1.5 से 2 फीट की विशेष दिव्य राखी मुख्य आकर्षण का केंद्र रही। इस राखी में शैव और वैष्णव परंपरा का सुंदर संगम दिखा, जिसमें कांच वर्क, रुद्राक्ष, त्रिनेत्र, ॐ और त्रिपुंड के साथ-साथ भगवान श्री कृष्ण के प्रिय मोर पंख और गौ माता की आकृति को भी समाहित किया गया था।

सवा लाख लड्डुओं के भोग से खुला एक माह का उपवास
भस्म आरती में पंचामृत अभिषेक और भव्य शृंगार के बाद बाबा महाकाल को शुद्ध घी और बेसन से बने सवा लाख लड्डुओं का महाभोग लगाया गया। मंदिर परिसर में ही बीते एक सप्ताह से पुजारी परिवार द्वारा यह प्रसादी तैयार की जा रही थी। पुजारी पं. ओम गुरु और पं. राघव गुरु ने बताया कि रक्षाबंधन पर बाबा को लगाए जाने वाले इस महाभोग की खास मान्यता है। पूरे श्रावण मास व्रत और उपवास रखने वाले भक्त भस्म आरती के बाद बाबा की इसी महाप्रसादी को ग्रहण कर अपना एक माह का उपवास खोलते हैं।
रक्षाबंधन के अवसर पर भगवान महाकाल को सवा लाख लड्डुओं का महाभोग भी लगाया गया। धार्मिक मान्यता है कि जो श्रद्धालु पूरे श्रावण मास में व्रत और उपवास रखते हैं, वे श्रावणी पूर्णिमा पर भगवान महाकाल के लड्डू प्रसाद को ग्रहण कर अपना उपवास खोलते हैं। अधिक से अधिक श्रद्धालुओं तक प्रसाद पहुंच सके, इसके लिए पुजारी परिवार की ओर से बाबा महाकाल को सवा लाख लड्डुओं का भोग लगाया गया। रक्षाबंधन के मौके पर महाकाल मंदिर में हुई विशेष पूजा-अर्चना श्रद्धालुओं के लिए आस्था और परंपरा का खास आकर्षण बनी रही।

भस्म आरती में उमड़ा जनसैलाब
श्रावण के अंतिम दिन और रक्षाबंधन के संयोग पर बाबा महाकाल का आशीर्वाद लेने के लिए देर रात से ही श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा था। भस्म आरती के दौरान पूरे मंदिर परिसर में 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष गूंजते रहे। पंडे-पुजारियों की बहनों और देश-विदेश से आई महिला श्रद्धालुओं ने महाकाल को राखी अर्पित कर अपने भाइयों की लंबी उम्र, समृद्धि और विश्व कल्याण की कामना की।

रात 2 बजे मंदिर पहुंचीं महिलाएं
राखी बांधने के लिए पुजारी ओम गुरु और राजेश शर्मा के परिवार की महिलाएं रात करीब 2 बजे ही मंदिर पहुंच गई थीं। भस्म आरती के दौरान राखी बांधने तक उन्होंने मंत्रोच्चार किया। भस्म अर्पित होने के बाद विशेष राखी बाबा महाकाल को समर्पित की गई।राखी बांधने के बाद महिलाओं ने मंदिर से मिले प्रसाद से अपना व्रत खोला। इसके बाद उन्होंने अपने परिवार के भाइयों को राखी बांधी।

रेशमी कपड़े, मोर पंख और रुद्राक्ष से सजाई राखी
पुजारी आकाश गुरु ने बताया कि करीब 2 फीट की इस विशेष राखी को रेशमी कपड़े, रेशमी धागे और आभूषणों से तैयार किया गया है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण के प्रिय मोर पंख और गौ माता को भी स्थान दिया गया है।

राखी को आकर्षक बनाने के लिए इसमें कांच वर्क, मोर पंख और रुद्राक्ष का इस्तेमाल किया गया है। इसके साथ ही बाबा महाकाल के प्रिय त्रिनेत्र, ॐ और त्रिपुंड को भी राखी के डिजाइन में शामिल किया गया है।

राखी बनाते समय किया मंत्र जाप
पुजारी परिवार की महिलाओं ने राखी तैयार करते समय भी धार्मिक परंपराओं का पालन किया। राखी निर्माण के दौरान वे लगातार ‘जय महाकाल’ और ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करती रहीं। करीब एक सप्ताह की मेहनत से तैयार इस राखी को रक्षाबंधन की भस्म आरती में बाबा महाकाल को अर्पित किया गया।

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