लखनऊ
यूपी की योगी सरकार विधानसभा चुनाव से पहले महिलाओं को बड़ी सौगात देने की तैयारी कर रही है। पड़ोसी राज्य बिहार की तर्ज पर लाई जा रही यह योजना बड़ा चुनावी दांव कहा जा रहा है। योजना के तहत महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने का खाका तैयार किया गया है। पात्र महिलाओं को तीन चरणों में 50 हजार रुपए दिए जाएंगे। चुनाव से पहले 20 हजार और नई सरकार बनने पर 10-10 हजार की किस्तों में रुपए बांटे जाएंगे। बिहार में चुनाव से ठीक पहले हर परिवार की एक महिला को 10 हजार रुपये मुख्यमंत्री रोजगार योजना के तहत दिए गए थे। यूपी में अगले पांच महीनों के अंदर चुनावी प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि कई राज्यों में महिलाओं को दी गई सौगातों ने चुनावी फिजां बदल दी थी। बिहार ही नहीं मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में भी महिलाओं के लिए ऐसी ही योजनाएं चुनाव से पहले लांच की गईं थीं। महिलाओं के खाते में सीधे रुपये भेजे गए थे। इसका असर चुनावी नतीजों पर साफ दिखा था। इसी मॉडल पर अब यूपी में सरकार आगे बढ़ने की तैयारी कर चुकी है। महिलाओं को सीधे रुपए भेजकर पूरे परिवार को अपने पक्ष में करने की रणनीति पर काम हो रहा है। यह योजना ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों की महिलाओं के लिए एक साथ लांच की जाएगी।
तीन चरणों में दी जाएगी सहायता
महिलाओं को तीन चरणों में वित्तीय सहायता देने की तैयारी की जा रही है। पात्र महिलाओं के खाते में 20 हजार की पहली किस्त के रूप में वित्तीय सहायता दी जाएगी। स्वरोजगार के नाम पर दी गई सहायता की यह पहली किस्त तय करेगी कि इसका कितना इस्तेमाल महिलाओं ने किया है। इसी के आधार पर आगे की किस्त का फैसला किया जाएगा। अगले चरण में 30 हजार एक साथ या तीन चरणों में 10-10 हजार दिए जा सकते हैं। इन रुपयों से महिलाएं कोई भी काम शुरू कर सकती हैं या स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर अपनी कमाई का रास्ता बना सकेंगी।
चुनावी समीकरण और राजनीतिक प्रभाव
उत्तर प्रदेश में आधी आबादी यानी महिला मतदाताओं का वोट प्रतिशत लगातार बढ़ रहा है।महिलाएं सरकारों को बनाने में प्रमुख भूमिका निभाती भी रही हैं। ऐसे में सरकार की उन पर सीधी नजरें टिकी हुई हैं। विभागीय स्तर पर योजना के लिए पात्रता शर्तों और आवेदन प्रक्रिया के नियमों की रूपरेखा तैयार की जा रही है। अन्य योजनाओं की तरह इस योजना में भी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी सीधे महिला के खाते में ही रुपए भेजे जाएंगे। इससे बिचौलिया व्यवस्था भी समाप्त हुई है।
गेम चेंजर साबित हो सकती है योजना
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं के लिए आ रही यह योजना अन्य राज्यों की तरह यूपी में भी चुनावी दृष्टि से गेम चेंजर साबित हो सकती है। परिवार की एक महिला को लाभ देने से पूरे परिवार को फायदा होता है। इससे परिवार के चार से पांच लोग सरकार के पक्ष में आ सकते हैं। पात्रता शर्तों में सरकार की नजरें खासतौर से दलित और पिछड़े वर्ग की महिलाओं पर रहेंगी। इससे सपा के पीडीए की काट भी हासिल की जा सकेगी। लोकसभा चुनाव में सपा को मिली जीत के पीछे दलित-पिछड़े वर्ग का समर्थन ही माना गया था।
महिला कल्याण के लिए एक हजार करोड़ से ज्यादा की राशि
पिछले दिनों विधानसभा से पास कराए गए अनुपूरक बजट में योगी सरकार ने महिला कल्याण के लिए 1094.40 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि उपलब्ध करवाने का प्रस्ताव रखा था। निराश्रित महिला पेंशन योजना के लिए 930 करोड़ रुपये और मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना को 110 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। उत्तर प्रदेश रानी लक्ष्मीबाई महिला एवं बाल सम्मान कोष के लिए 54.30 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा 60 साल से अधिक उम्र की महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा के लिए भी 100 करोड़ की व्यवस्था की गई है।









