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भोपाल केंद्रीय जेल में गूंजे संगीत के सुर

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भोपाल 

जेल विभाग द्वारा बंदियों के सुधार, पुनर्वास एवं मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से समय-समय पर विभिन्न सांस्कृतिक एवं प्रेरणादायी गतिविधियों का आयोजन किया जाता है। इसी क्रम में भोपाल केंद्रीय जेल में प्रतिष्ठित रागरंग म्यूजिकल ग्रुप द्वारा एक संगीतमय सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बंदियों को सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराना, उनमें आत्मविश्वास एवं जीवन के प्रति नई आशा का संचार करना तथा संगीत के माध्यम से मानसिक तनाव को कम करना था।

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कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उपस्थित बंदी भाई-बहनों ने पूरे उत्साह, अनुशासन एवं भावनात्मक जुड़ाव के साथ गीत-संगीत का आनंद लिया। सदाबहार फिल्मी गीतों, देशभक्ति गीतों एवं प्रेरणादायी प्रस्तुतियों ने पूरे जेल परिसर को संगीत की मधुर स्वर लहरियों से गुंजायमान कर दिया। कार्यक्रम के दौरान बंदियों के चेहरों पर मुस्कान, आत्मीयता एवं उत्साह स्पष्ट रूप से दिखाई दिया तथा उन्हें कुछ समय के लिए तनावमुक्त एवं आनंदमय वातावरण प्राप्त हुआ।

रागरंग म्यूजिकल ग्रुप के आयोजक श्री सुमीत शर्मा के नेतृत्व में श्री मोहन बेलानी, सुश्री तनु सिंह, सुश्री रीना मेहता, श्री मिलिंद (मिलन आर्टिस्ट), श्री योगेश भालानी, सुश्री सोनल शर्मा एवं श्री आबिद (बंटीभाई) ने अपनी उत्कृष्ट संगीतमय प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को यादगार बना दिया। कलाकारों ने एक से बढ़कर एक गीत प्रस्तुत कर उपस्थित बंदियों का भरपूर मनोरंजन किया तथा उन्हें सकारात्मक सोच एवं जीवन मूल्यों का संदेश दिया।

इस अवसर पर रागरंग म्यूजिकल ग्रुप के सदस्यों ने कहा कि संगीत मानव जीवन को जोड़ने वाली सार्वभौमिक भाषा है। यह केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि मानसिक शांति, आत्मबल, संवेदनशीलता एवं सकारात्मक ऊर्जा का सशक्त स्रोत भी है। ऐसे कार्यक्रम समाज के प्रत्येक वर्ग में आशा, विश्वास एवं मानवीय मूल्यों को मजबूत करने का कार्य करते हैं।

जेल प्रशासन ने रागरंग म्यूजिकल ग्रुप के सभी कलाकारों एवं आयोजकों के इस सराहनीय सामाजिक योगदान की मुक्तकंठ से प्रशंसा करते हुए उनका आभार व्यक्त किया। अधिकारियों ने कहा कि जेलों में आयोजित होने वाली इस प्रकार की सांस्कृतिक गतिविधियाँ बंदियों के व्यक्तित्व विकास, मानसिक संतुलन, सकारात्मक सोच एवं सामाजिक पुनर्वास की प्रक्रिया को गति प्रदान करती हैं। भविष्य में भी बंदियों के सर्वांगीण विकास एवं समाज की मुख्यधारा से उनके सकारात्मक पुनर्संयोजन के उद्देश्य से ऐसे रचनात्मक कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जाते रहेंगे।

 

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