Home मध्य प्रदेश हर गौशाला में न्यूनतम पाँच हजार गौवंश का होगा पालन, 30 प्रतिशत...

हर गौशाला में न्यूनतम पाँच हजार गौवंश का होगा पालन, 30 प्रतिशत रखे जाएंगे दुधारू नस्ल के गौवंश

12
0
Jeevan Ayurveda

भोपाल 

गोकुल धाम स्थापना नीति-2025

Ad

पशुपालन एवं डेयरी विभाग राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार लखन पटेल ने बुधवार को मंत्रालय में पशुपालन एवं डेयरी विभाग अंतर्गत गौसंवर्धन बोर्ड के कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने स्वावलंबी गौशाला नीति 2025 गोकुल धाम स्थापना नीति अंतर्गत जारी निविदा में प्राप्त प्रस्तावों पर विस्तृत चर्चा की और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए।

राज्यमंत्री पटेल ने कहा कि उक्त नीति अंतर्गत परियोजनाओं के लिए न्यूनतम पाँच हजार गौवंश का पालन अनिवार्य है, जिसमें से 30 प्रतिशत गौवंश दुधारू नस्ल के होने चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रत्येक 5000 गौवंश के लिये अधिकतम 125 एकड़ शासकीय भूमि उपयोग के अधिकार (User Rights) के आधार पर दी जाएगी। अतिरिक्त 1000 गौवंश की वृद्धि पर 25 एकड़ अतिरिक्त भूमि दी जाएगी। इसके साथ ही व्यावसायिक गतिविधियों के लिए 5 एकड़ अतिरिक्त भूमि दी जा सकेगी। वहीं, निराश्रित गौवंशों के लिए शासन की नीति अनुसार प्रति दिवस प्रति गौवंश अनुदान राशि 40 रुपये दी जा रही है।

राज्यमंत्री पटेल ने कहा कि मध्यप्रदेश स्वावलंबी गौशाला (गोकुल धाम) की स्थापना की नीति 2025 का मुख्य उद्देश्य है प्रदेश में वृहद स्वावलंबी गौशालाओं का मॉडल तैयार करना, निराश्रित गौवंश का उपयुक्त व्यवस्थापन करना, जहां उन्हे संतुलित आहार, व्यवस्थित आवास एवं आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हो सके। इसके साथ ही बजट पर न्यूनतम भार पर अधिकाधिक निराश्रित गौवंश का उपयुक्त व्यवस्थापन करना, वृहद गौशालाओं की परियोजनाओं के माध्यम से पड़त भूमि का विकास तथा निजी भागीदारी के माध्यम से गौ-उत्पादों के निर्माण एवं विपणन की श्रृंखला तैयार करना है। इसके अलावा वैकल्पिक ऊर्जा निर्मित करने की नवीन तकनीकों के लिए निजी निवेश के लिए अनुकूल वातावरण भी तैयार करना है।

दुग्ध उत्पादन व प्रोसेसिंग उद्योग को दिया जाएगा बढ़ावा

राज्यमंत्री पटेल ने कहा कि निराश्रित गौवंश के प्रबंधन, उपयोगिता वृद्धि एवं बड़े पैमाने पर व्यावसायिक इकाइयों के लिये स्वावलंबी गौशालाओं की स्थापना की जाएगी। निजी निवेश व भागीदारी के माध्यम से गोपालन, दुग्ध प्रसंस्करण, जैविक खाद, पंचगव्य, बायो-CNG, औषधि व पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा। उन्नत नस्लें (गिर, साहीवाल, थारपारकर) + कृत्रिम गर्भाधान एवं सेक्सड सॉर्टड सीमेन से उच्च दुग्ध उत्पादन, गौ उत्पादों का निर्माण और विपणन की श्रृंखला तैयार की जाएगी। 30 प्रतिशत उच्च उत्पादक नस्ल की गायें, दुग्ध उत्पादन व प्रोसेसिंग उद्योग को बढ़ावा दिया जाएगा। गोबर व कृषि अवशेष से NPK युक्त जैविक खाद, मिट्टी की उर्वरता व उत्पादन में वृद्धि होगी। बायोगैस-CNG व सोलर ऊर्जा संयंत्र; नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा को प्रोत्साहन। प्रकृति के नज़दीक रमणीक स्थानों पर स्थित गौशालाएं; प्रदर्शन, प्रबंधन व प्रोसेसिंग से पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा। बैठक में 13 जिले रायसेन, दमोह, जबलपुर, सागर, अशोकनगर, खरगोन, रीवा, बैतूल, पन्ना, भिण्ड, राजगढ़, भोपाल और मंडला में प्राप्त जमीनों के संबंध में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि निविदा के तहत 14 स्थलों के लिए प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इसमें निवेशकों की संख्या 16 और कुल भूमि 3,457 एकड़ व गौवंश की क्षमता 1,30,000 है।

बैठक में पशुपालन एवं डेयरी प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव, संचालक पशुपालन एवं डेयरी डॉ. पी.एस. पटेल, गौसंवर्धन बोर्ड के रजिस्टार डॉ. अनुपम अग्रवाल सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

Jeevan Ayurveda Clinic

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here