Home अध्यात्म रसोई में चूल्हा और सिंक पास-पास होने से बढ़ सकता है वास्तु...

रसोई में चूल्हा और सिंक पास-पास होने से बढ़ सकता है वास्तु दोष, जानें असर

10
0
Jeevan Ayurveda

वास्तु शास्त्र में रसोई घर को सेहत और समृद्धि का केंद्र माना जाता है.  यहां मौजूद हर चीज़ की अपनी एक ऊर्जा होती है. रसोई में सबसे महत्वपूर्ण दो ही चीज़ें हैं चूल्हा (अग्नि तत्व) और सिंक (जल तत्व). वास्तु के नियमों के अनुसार, आग और पानी एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन हैं.  अगर ये दोनों एक ही स्लैब पर पास-पास हों, तो घर में ऊर्जा का संतुलन बिगड़ जाता है. आजकल के छोटे फ्लैट्स और मॉड्यूलर किचन में जगह की कमी के कारण अक्सर सिंक और चूल्हा एक ही लाइन में होते हैं. आइए जानते हैं कि यह कैसे हमारे जीवन पर असर डालता है और बिना तोड़-फोड़ के इसे कैसे ठीक किया जा सकता है.

तत्वों का टकराव: क्या होता है असर?
जब आग और पानी एक ही स्लैब पर होते हैं, तो इसे तत्वों का संघर्ष कहा जाता है.  इसके मुख्य नुकसान ये हैं:

Ad

रिश्तों में खटास: किचन में काम करने वालों के स्वभाव में चिड़चिड़ापन आने लगता है और घर के सदस्यों के बीच छोटी-छोटी बातों पर बहस होने लगती है.

धन की हानि: अग्नि को लक्ष्मी का रूप माना जाता है. उसके ठीक बगल में बहता हुआ पानी यह संकेत देता है कि आपका कमाया हुआ पैसा बेकार की चीजों में पानी की तरह बह जाएगा.

स्वास्थ्य समस्याएं: घर के लोगों की पाचन शक्ति कमजोर हो सकती है और वे बार-बार बीमार पड़ सकते हैं.

कैसे दूर करें यह वास्तु दोष? (आसान उपाय)
अगर आपके किचन का डिज़ाइन ऐसा है जिसे बदला नहीं जा सकता, तो घबराएं नहीं.  इन आसान देसी जुगाड़ और वास्तु उपायों से आप इसके नकारात्मक असर को कम कर सकते हैं.

बीच में रखें लकड़ी का बोर्ड:
चूल्हे और सिंक के बीच में एक लकड़ी का चॉपिंग बोर्ड या लकड़ी का कोई स्टैंड रख दें.  वास्तु में लकड़ी को आग और पानी के बीच का संतुलन (एयर एलिमेंट) माना जाता है, जो दोनों की टक्कर को रोकता है.

मनी प्लांट का उपयोग:
सिंक और चूल्हे के बीच में एक छोटा सा मनी प्लांट या कोई भी हरा पौधा रख दें.  हरा रंग सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है और अग्नि-जल के दोष को सोख लेता है.

दूरी का ध्यान:
कोशिश करें कि चूल्हा और सिंक कम से कम दो फीट की दूरी पर हों. अगर दूरी कम है, तो बीच में एक टाइल या कोई बाधा (Separator) खड़ी कर दें.

गंगाजल या नमक का पानी:
हफ्ते में एक बार किचन के स्लैब को समुद्री नमक मिले पानी से पोंछें. नमक नकारात्मक ऊर्जा को खींच लेता है.

बर्तनों की सफाई:
रात को कभी भी सिंक में गंदे बर्तन न छोड़ें. रात भर सिंक का खाली और साफ रहना किचन की ऊर्जा को शुद्ध रखता है.

खास सलाह
वास्तु शास्त्र सिर्फ नियम नहीं, बल्कि एक संतुलन है.  यदि आप अपने किचन को साफ-सुथरा रखते हैं और खाना बनाते समय मन को शांत रखते हैं, तो वास्तु दोषों का प्रभाव अपने आप कम हो जाता है. कोशिश करें कि खाना बनाते समय आपका चेहरा पूर्व दिशा (East) की तरफ हो, यह सबसे शुभ माना जाता है.

Jeevan Ayurveda Clinic

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here