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महिला आरक्षण पर सड़क पर उतरी BJP, भोपाल में ‘जन आक्रोश’ प्रदर्शन; CM ने विपक्ष को दिया कड़ा संदेश

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भोपाल
  लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं हो पाने के विरोध में मध्य प्रदेश में सियासी माहौल गरमा गया है। अब इसकी गूंज सड़कों तक पहुंच गई है। राजधानी भोपाल में सोमवार को भाजपा महिला मोर्चा की ओर से ‘जन आक्रोश महिला पदयात्रा’ निकाली गई। बड़ी संख्या में महिलाओं ने इसमें भाग लेकर अपने अधिकारों की आवाज बुलंद की।

भोपाल के एमवीएम कॉलेज ग्राउंड से शुरू हुई पदयात्रा रोशनपुरा चौराहे की ओर बढ़ी। इसमें छह विशेष रथ भी शामिल किए गए थे। महिलाओं के साथ पार्टी के वरिष्ठ नेता भी इस यात्रा में शामिल हुए। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित कई मंत्री और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

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पद यात्रा भोपाल के एमवीएम कॉलेज ग्राउंड से लोक भवन होते हुए रोशनपुरा चौराहे पहुंची। यहां मुख्यमंत्री ने काले गुब्बारे उड़ाकर इसका समापन किया।

इससे पहले हुई सभा में मुख्यमंत्री यादव ने कहा- नारी सब भूल सकती है लेकिन अपना अपमान कभी नहीं भूलती। कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने महिलाओं के अधिकार का बिल गिरने पर खुशियां मनाईं। जश्न मनाया। हम बहनों के अधिकार को कुचलने के खिलाफ विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर निंदा प्रस्ताव पारित करेंगे।

  •     मुख्यमंत्री ने कहा- प्रियंका गांधी बड़ी-बड़ी बातें करती थीं कि मैं नारी हूं, लड़ सकती हूं। लेकिन वह बड़ी-बड़ी बातें कहां गईं, जब आपने बहनों के अधिकारों को फांसी देने का काम किया। राहुल गांधी के पिताजी ने भी 40 साल पहले तीन तलाक लागू कर बहनों के अधिकारों पर डाका डाला था। यही कांग्रेस का अतीत है।
  •     बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा- जब मौका लगे, तब बहनें अपना आक्रोश दिखाएं। कांग्रेस के नेताओं से पूछे कि बहनों को अपमानित करने का अधिकार आपको किसने दिया? कांग्रेसियों के घर जाकर पूछें कि जो बहन आपके घर की शोभा बढ़ाती है, जिस मां ने आपको जन्म दिया, उनके सपनों को चूर-चूर करने का हक किसने दिया?
  •     बीजेपी महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष अश्वनी परांजपे ने कहा- कांग्रेस के नेताओं ने संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम गिराकर जश्न मनाया, यह महिलाओं के अपमान का प्रतीक था। मातृ शक्ति इस अपमान का जवाब देगी। अब याचना नहीं, रण होगा।
  •     पंचायत राज्यमंत्री राधा सिंह, अपनी बेटी अंजलि सिंह के साथ जन आक्रोश महिला पदयात्रा में शामिल हुई। उन्होंने कहा- आजादी के इतने सालों बाद भी हमें अपने हक के लिए लड़ना पड़ रहा है। राहुल गांधी को शर्म आना चाहिए कि उन्होंने बहनों का साथ नहीं दिया।
  •     मंत्री प्रतिमा बागरी ने कहा- कांग्रेस समेत विपक्षी पार्टियों ने महिलाओं को हक देने का विरोध किया है। हम सड़कों पर उतरकर उसका विरोध कर रहे हैं।
  •     सागर लोकसभा सीट से सांसद लता वानखेड़े ने कहा- ये केवल बिल नहीं, बल्कि महिलाओं के पंचायत से पार्लियामेंट तक पहुंचने का दरवाजा था, जिसे कांग्रेस और इंडी गठबंधन ने बंद कर दिया। विपक्ष को महिलाओं का सशक्तिकरण नहीं चाहिए। ये वही लोग हैं, जो मंच पर महिलाओं की बात करके बड़ी-बड़ी घोषणाएं करते हैं। लेकिन इनकी सोच है कि महिलाएं सिर्फ भीड़ का हिस्सा रहें। तालियां बजाएं, नेतृत्व न करें।

क्या है पूरा मामला?
17 अप्रैल को लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा 131वां संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं हो सका। इस विधेयक में लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 816 करने और महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रस्ताव था। लेकिन इसे पास कराने के लिए जरूरी बहुमत नहीं मिल पाया। इसी के विरोध में भाजपा ने इस मुद्दे को जन आंदोलन बनाने की रणनीति शुरू कर दी है।

भाजपा का आरोप – महिलाओं के अधिकारों पर चोट
प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कांग्रेस और विपक्ष पर महिलाओं के सपनों को तोड़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में काम हो रहा था, लेकिन विपक्ष ने इसमें बाधा डाली। खंडेलवाल ने यह भी कहा कि अब यह सवाल घर-घर तक पहुंचाया जाएगा कि महिलाओं के अधिकारों को रोकने का जिम्मेदार कौन है।

सीएम मोहन यादव का सख्त संदेश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि यह लड़ाई सिर्फ एक पार्टी की नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान की है। उन्होंने कहा कि नारी अपना अपमान कभी नहीं भूलती। महिलाओं के अधिकारों के लिए सरकार ने पूरी कोशिश की, लेकिन बहुमत नहीं मिल सका। सीएम ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि उन्होंने देश की आधी आबादी के अधिकारों का सम्मान नहीं किया।

सच सामने लाया जाएगा – भाजपा नेता
कार्यक्रम में भाजपा नेताओं ने संकेत दिया कि आने वाले समय में इस मुद्दे को और बड़े स्तर पर उठाया जाएगा। नगरीय निकायों में निंदा प्रस्ताव पारित कराने और विधानसभा में इस मुद्दे को उठाने की बात कही गई। नेताओं ने कहा कि विपक्ष के खिलाफ जनता के बीच जाकर सच सामने लाया जाएगा।

महिला मोर्चा का ऐलान – अब याचना नहीं, रण होगा
भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष अश्विनी परांजपे ने कहा कि यह केवल एक विरोध नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि विधेयक गिरने पर जश्न मनाना महिलाओं का अपमान है और अब देश की महिलाएं इसका जवाब देंगी।

आंदोलन को देशभर में ले जाने की तैयारी
भाजपा महिला मोर्चा इस पदयात्रा को एक बड़े आंदोलन की शुरुआत मान रही है। नेताओं का कहना है कि आने वाले दिनों में इसे प्रदेश से बाहर देशभर में ले जाया जाएगा, ताकि महिलाओं के अधिकारों के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया जा सके।

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