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सोशल ऑडिट में खुला पंचायत घोटाला, फर्जी भुगतान और गबन पर मंत्री ने दिए कार्रवाई के संकेत

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रायपुर.

ग्राम पंचायतों में विकास के नाम पर प्रदेश के सरकारी खजाने की बंदरबांट और भारी वित्तीय गड़बड़ी का मामला सामने आया है. सोशल ऑडिट रिपोर्ट 2025-26 के मुताबिक, प्रदेश की पंचायतों में नियमों को ताक पर रखकर 151.07 करोड़ रुपए का फर्जी भुगतान किया गया है. यह वह राशि है, जिसे सरकारी गाइडलाइन्स और निर्धारित प्रक्रियाओं को दरकिनार कर ठिकाने लगा दिया गया.

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राज्य की कुल 11,717 पंचायतों में से 11,302 का ऑडिट हो चुका है. इस सूक्ष्म जांच में 19.66 करोड़ के सीधे वित्तीय गबन के 6,331 मामले भी उजागर हुए हैं. इसके अतिरिक्त, रिकॉर्ड संधारण और टेंडर नियमों के उल्लंघन के 13,861 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनसे जुड़े लेनदेन की कुल राशि 20.49 करोड़ आंकी गई है.

बिलासपुर में सबसे ज्यादा गड़बड़ी, कोरबा गबन में
रिपोर्ट के मुताबिक, नियमों को ताक पर रखने के मामले में बिलासपुर जिला सबसे आगे है, जहां सर्वाधिक 14.33 करोड़ का वित्तीय गड़बड़ी हुई. वहीं, सीधे तौर पर राशि के दुरुपयोग या गबन के मामले में कोरबा जिला शीर्ष पर रहा, जहां 611 मामलों के जरिए 2.42 करोड़ की हेराफेरी रिपोर्ट की गई है. पड़ोसी जिले जांजगीर-चांपा में भी 3.85 करोड़ की गड़बड़ी मिली.

उल्लंघन की 1800 से ज्यादा शिकायतें
प्रशासनिक प्रक्रियाओं के उल्लंघन के मामले में बालोदा बाजार जिले की स्थिति सबसे चिंताजनक है, जहां रिकॉर्ड 989 मामले दर्ज हुए हैं. वहीं, जमीनी स्तर पर हो रही इन गड़बड़ियों के खिलाफ गांव के लोगों में भी आक्रोश देखने को मिल रहा है. यही वजह है कि प्रदेशभर में आम जनता की ओर से कुल 1,863 आधिकारिक शिकायतें दर्ज कराई गई हैं, जिनमें राजनांदगांव जिला 225 शिकायतों के साथ सबसे ऊपर है. सबसे कम कोरिया में चार, बेमेतरा में पांच और जशपुर में 6 शिकायतें मिली हैं.
कुल ऑडिटेड पंचायत 11302

श्रेणी                 मामले    फंसी राशि (करोड़ रु.)
फर्जी भुगतान      4468     151.07
टेंडर में गड़बड़ी   13861    20.49
गबन                  6331     19.66

सख्ती से कर रहे हैं सोशल ऑडिट का काम – डिप्टी सीएम शर्मा
पंचायतों के सोशल ऑडिट को लेकर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने मीडिया से चर्चा में कहा कि इस बार ऑडिट का काम सख्ती से कर रहे हैं. ग्राम पंचायतों में पूरी औपचारिकता के साथ काम होना चाहिए. कोई हल्का काम पंचायतों में नहीं होना चाहिए. जो भी गड़बड़ी हो कार्रवाई कठोर होगी.

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