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युद्ध की आहट के बीच चीन का बड़ा कदम, ईरान को देगा घातक मिसाइल

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वाशिंगटन
अमेरिका से लगातार बढ़ते तनाव और युद्ध की धमकी के बीच चीन ने ईरान की तरफ मदद का हाथ बढ़ाया है। दोनों देशों के बीच एक अहम डील लगभग पूरी होने वाली है। इसके तहत ईरान को चीन में बनी सीएम-302 मिसाइल मिलने वाली है। यह एक सुपरसोनिक मिसाइल है जो दुश्मन की वॉरशिप को तबाह करने की क्षमता रखती है। इस मिसाइल की रेंज 290 किलोमीटर है। यह काफी तेजी से और नीचे रहते हुए उड़ान भरती है और सटीक निशाना लगाती है। ऐसे समय में जब अमेरिका, ईरान के तटीय इलाकों में अपनी वॉरशिप्स को तैनात कर रहा है, यह डील ईरान के लिए काफी अहम होगी। इन मिसाइलों की तैनाती ईरान की हमला करने की क्षमता में निर्णायक बढ़ोत्तरी करेगी।

गेमचेंजर बनेंगी चीनी मिसाइलें
ईरान ने चीन से यह मिसाइलें खरीदने के लिए दो साल पहले बातचीत शुरू की थी। लेकिन जानकारों के मुताबिक जब पिछले साल जून महीने में इजरायल और ईरान के बीच 12 दिन तक युद्ध चला तो दोनों देशों के बीच बातचीत ने रफ्तार पकड़ी। पिछली गर्मियों में बातचीत फाइनल स्टेज में पहुंची थी। तब ईरानी सेना और सरकार के वरिष्ठ अधिकारी चीन की यात्रा पर गए थे। इन लोगों में ईरान के डिप्टी डिफेंस मिनिस्टरी मसूद ओरेई भी शामिल थी। इजरायल के पूर्व इंटेलीजेंस ऑफिसर डैनी सिट्रीनोविच ने कहाकि अगर ईरान जहाजों पर हमला करने की सुपरसोनिक क्षमता हासिल कर लेता है तो यह पूरी तरह से गेमचेंजर होगा। उन्होंने कहाकि इन मिसाइलों को इंटरसेप्ट करना बहुत मुश्किल है।

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डिलीवरी की तारीख कब?
हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इस डील के तहत ईरान को कितनी मिसाइलें मिलेंगी और डिलीवरी डेट क्या होगी। इसके अलावा यह भी जानकारी नहीं है कि ईरान इन सुपरसोनिक मिसाइलों के लिए कितनी कीमत चुका रहा है। ईरानी विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहाकि ईरान अपने सहयोगी देशों के साथ सैन्य और सुरक्षा समझौता है। फिलहाल यह सबसे उपयुक्त समय है कि इन समझौतों का पूरी तरह से इस्तेमाल किया जाए।

अमेरिका ने क्या कहा
इन समझौतों पर चीन या अमेरिका की तरफ से फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं आई है। अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा हालात को लेकर डोनाल्ड ट्रंप काफी सख्त हैं। वाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहाकि ट्रंप का कहना है कि या तो ईरान समझौता करेगा नहीं तो पिछली बार की तरह उसके खिलाफ सख्त कदम उठाया जाएगा। बता दें कि चीन द्वारा ईरान को दी जा रही यह मिसाइलें सबसे उन्नत हथियारों में से एक हैं। हालांकि यह संयुक्त राष्ट्र के उस हथियार प्रतिबंध का उल्लंघन है, जिसे 2006 में पहली बार लगाया गया था। हालांकि 2015 में प्रतिबंधों को 2015 में अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ एक परमाणु समझौते के हिस्से के रूप में निलंबित कर दिया गया था। लेकिन फिर सितंबर में इसे लागू कर दिया गया था।

क्या हैं मौजूदा हालात
बता दें कि चीन और ईरान की यह डील ऐसे समय में हो रही है, जब अमेरिका ईरान की पहुंच के भीतर एक नौसेना बेड़े को इकट्ठा कर रहा है। इसमें एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन और उसका स्ट्राइक ग्रुप शामिल है। यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड और उसके एस्कॉर्ट भी इस क्षेत्र की ओर बढ़ रहे हैं। ये दोनों जहाज मिलकर 5,000 से अधिक कर्मियों और 150 विमानों को ले जा सकते हैं। अमेरिका अब इस तैयारी में जुटा है कि अगर ट्रंप हमले का आदेश देते हैं कि वह ईरान के खिलाफ हफ्तों तक अभियान जारी रख सके। इजरायली विशेषज्ञ सिट्रीनोविच ने कहाकि चीन ईरान में एक पश्चिम समर्थक शासन को नहीं देखना चाहता। यह उनके हितों के लिए खतरा होगा। वे उम्मीद कर रहे हैं कि खामेनेई सत्ता में बने रहेंगे। ट्रंप ने 19 फरवरी को कहाकि वह ईरान को उसके परमाणु कार्यक्रम पर समझौता करने के लिए 10 दिन दे रहे हैं। ऐसा न होने पर सैन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

 

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