Home देश पूर्व राजनयिक का बड़ा दावा: भारत की सीमाओं को नहीं मानता चीन,...

पूर्व राजनयिक का बड़ा दावा: भारत की सीमाओं को नहीं मानता चीन, अरुणाचल पर ड्रैगन की टेढ़ी नजर

52
0
Jeevan Ayurveda

नई दिल्ली 
पूर्व भारतीय राजनयिक के.पी. फैबियन ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि चीन की विस्तारवादी नीतियों को लेकर भारत को एक बार फिर सतर्क रहने की जरूरत है। चीन भारत की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान नहीं करता और अरुणाचल प्रदेश पर उसका दावा उसी विस्तारवादी मानसिकता का हिस्सा है, जो दशकों से चली आ रही है। बातचीत में फैबियन ने हालिया पेंटागन रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि चीन अरुणाचल प्रदेश को तिब्बत की तथाकथित ‘पांच उंगलियों’ में से एक मानता है। उन्होंने कहा कि यह सोच न तो नई है और न ही मासूम बल्कि यह चीन की सोची-समझी भू-राजनीतिक रणनीति को दर्शाती है।

फैबियन के अनुसार, चीन का इतिहास बताता है कि वह पड़ोसी देशों की सीमाओं का सम्मान करने के बजाय विस्तार को अपना अधिकार समझता है। उन्होंने साफ कहा, “चीन भारत की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान नहीं करता।”हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि भारत व्यावहारिक नीति अपनाते हुए व्यापार, निवेश और संवाद के स्तर पर चीन से रिश्ते बनाए रखने की कोशिश कर रहा है, लेकिन इससे चीन की असल मंशा नहीं बदलती। पेंटागन की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों को रोकने की कोशिश कर रहा है।
 
इस पर फैबियन ने दो टूक कहा कि चीन चाहे जितनी कोशिश कर ले, वह भारत-अमेरिका रिश्तों को रोक नहीं सकता। रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने अपनी तथाकथित ‘कोर इंटरेस्ट्स’ की सूची में अरुणाचल प्रदेश, ताइवान, दक्षिण चीन सागर और अन्य विवादित क्षेत्रों को शामिल कर लिया है। बीजिंग 2049 तक “महान चीनी पुनरुत्थान” के नाम पर सैन्य और भू-राजनीतिक विस्तार की योजना पर काम कर रहा है।विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा पर तनाव कम करने के बावजूद भारत को चीन की मंशा को लेकर भ्रम में नहीं रहना चाहिए। अरुणाचल पर दावा, एलएसी पर दबाव और कूटनीतिक चालें ये सभी चीन की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा हैं।

Ad
Jeevan Ayurveda Clinic

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here