Home विदेश पाकिस्तान में पहली बार गूंजेगी संस्कृत, गीता और महाभारत पढ़ाने की ऐतिहासिक...

पाकिस्तान में पहली बार गूंजेगी संस्कृत, गीता और महाभारत पढ़ाने की ऐतिहासिक पहल

50
0
Jeevan Ayurveda

इस्लामाबाद 
भारत और पाकिस्तान भले ही कभी एक ही रहे हों लेकिन आज दोनों देश के बीच राजनीतिक दूरियां इतनी बढ़ गई हैं कि अंतरराष्ट्रीय पटल पर दोनों देश एक दूसरे के दुश्मन बन गए हैं। वहीं इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि दोनों देशों की संस्कृति एक ही बीजे से उपजे हुए दो पौधों की तरह है जिसमें समानता को कभी खत्म नहीं किया जा सकता है। बंटवारे के बाद पहली बार है जब पाकिस्तान के किसी विश्वविद्यालय में संस्कृति का कोर्स शुरू किया गया है। इतना ही नहीं तैयारी यह भी है कि आने वाले समय में पाकिस्तान में भी भगवद्गीता और महाभारत की शिक्षा दी जाएगी।
 
लाहौर यनिवर्सिटी ऑफि मैनेजमेंट साइंसेज (LUMS) ने पारंपरिक भाषाओं के चार क्रेडिट कोर्स शुरू किए हैं। इसमें से एक संस्कृत भी है। फोरमैन क्रिश्चियन कॉलेज में समाजशास्त्र के असोसिएट प्रोफेसर डॉ. शाहिद रशीद के प्रयासों से यह सं हो बपाया है। वह खुद भी संस्कृत के विद्वान हैं। द ट्रि्ब्यून से बातचीत में उन्होंने बताया कि पारंपरिक भाषाओं में ज्ञान का सागर छइा है। मैंने पहले अरबी और फारसी पढ़ी और इसके बाद संस्कृत पढ़नी शुरू की। उन्होंने कहा, मुझे संस्कृत का व्याकरण समझने में एक साल लग गया और अब भी मैं कोशिश कर रहा हूं।

उन्होंने बताया कि तीन महीने की वीकेंड वर्कशॉप में संस्कृत का कोर्स चलाया गया था। इसके बाद छात्रों में संस्कृति के प्रति रुचि दिखाई दी। एलयूएमएस में गुरमानी सेंटर के डायरेक्टर डॉ. अली उस्मान कासिम ने कहा कि पाकिस्तान के इलाके में भी संस्कृत पर बहुत काम हुआ है। अब भी पंजाब यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी में संस्कृति की दुर्लभ पुस्तकें और ग्रंथ उपलब्ध हैं। यहां तक कि संस्कृत में लिखे पत्ते भी लाइब्रेरी में मौजूद हैं जिन्हें बाद में जेसीआर वूलनर ने एकत्रित किया था। इनका इस्तेमाल विदेशी शोधकर्ता ही करते हैं। वहीं पाकिस्तान में संस्कृत की शिक्षा पर ध्यान नहीं दिया गया।
ये हमारी भी भाषा है

Ad

डॉ. रशीद ने कहा कि बहुत सारे लोगों को लगता है कि यह भाषा हिंदू धार्मक ग्रंथों के लिए ही है। मैं उनको बताना चाहता हूं कि यह पूरे क्षेत्र की भाषा है। संस्कृत के व्याकरण के रचयिता पाणिनि का गांव भी यहीं हुआ करता था। सिंधु सभ्यता के दौरान यहां बहुत ज्यादा लेखन हुआ। संस्कृत एक पर्वत की तरह है जिसमें बहुत सारे खजाने हैं। हमें इनको स्वीकार करना है। यह किसी एक विशेष धर्म से बंधी हुई नहीं है।

उन्होंने कहा कि सीमा के दोनों तरफ जब संस्कृत पर काम होगा तो आप कल्पना करिए कि भारत के हिंदू और सिख अरबी पारसी सीखेंगे और पाकिस्तान के मुसलमान संस्कृति सीखेंगे। इससे दक्षिण एशिया में एक भाषा सेतु का निर्माण होगा। उन्होंने कहा कि भाषा की कोई सीमा नहीं होती है। उन्होंने बताया कि उनके पूर्वज हरियाणा के करनाल में रहते थे। वहीं उनकी मां उत्तर प्रदेश के शेखपुरा की रहने वाली हैं। उन्होंने कहा कि देवनागरी लिपि बहुत ही आकर्षक है।
गीता और महाभारत पर भी लॉन्च होंगे कोर्स

डॉ. कासमी ने कहा कि यूनिवर्सिटी का प्लान महाभारत और भगवद्गीता के कोर्स शुरू करने का भी है। हो सकता है कि 10 से 15 सालों में पाकिस्तान से गीता और महाभारत के भी विद्वान निकलें।

 

Jeevan Ayurveda Clinic

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here