Home देश दिल्ली हाई कोर्ट जज का महज एक महीने में ट्रांसफर, वजह बनी...

दिल्ली हाई कोर्ट जज का महज एक महीने में ट्रांसफर, वजह बनी चर्चा का विषय

70
0
Jeevan Ayurveda

नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उच्च न्यायालयों के कई जजों के स्थानांतरण की सिफारिश की है। इस बीच सबसे ज्यादा चर्चा दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस अरुण मोंगा की है। उन्हें राजस्थान हाई कोर्ट भेजा गया है, जहां से एक महीने पहले ही वह दिल्ली आए थे और 21 जुलाई को शपथ ली थी। ऐसे में इस बात को लेकर चर्चा है कि आखिर एक महीने के अंदर ही ऐसा क्या हो गया कि उच्च न्यायालय के जज को राजस्थान वापस भेज दिया गया। कुल 14 जजों का बुधवार को ट्रांसफर करने की सिफारिश कॉलेजियम की ओर से की गई। चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली कॉलेजियम की मीटिंग 25 और 26 अगस्त को हुई थी।

दिल्ली हाई कोर्ट के एक और जज टीवी गंजू का कर्नाटक हाई कोर्ट में हुआ है। इसके अलाला राजस्थान हाई कोर्ट से जस्टिस दिनेश मेहता और जस्टिस अवनीश झिंगन का ट्रांसफर भी दिल्ली उच्च न्यायालय हुआ है। केरल से जस्टिस चंद्रशेखरन सुधा को भेजा गया है। कॉलेजियम की सिफारिशों पर मुहर लगने के बाद दिल्ली उच्च न्यायालय में जजों की संख्या 45 हो जाएगी। इस उच्च न्यायालय में मंजूर जज के पदों की संख्या 60 है। आमतौर पर पूरा कोरम किसी भी उच्च न्यायालय में कम ही रहता है। खासतौर पर इलाहाबाद हाई कोर्ट में ऐसा मुश्किल होता है, जहां जज के पदों की मंजूर संख्या 160 है। फिलहाल यहां 84 जज ही हैं।

Ad

बता दें कि जस्टिस अवनीश झिंगन का ट्रांसफर पहले पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से गुजरात हुआ था। फिर वह राजस्थान लाए गए और अब दिल्ली की तैयारी है। बता दें कि जस्टिस अरुण मोंगा तो मूलत: पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के ही जज हैं। उन्हें राजस्थान भेजा गया था और फिर दिल्ली आए तो 21 जुलाई को शपथ ली थी। लेकिन अब एक महीने के अंतराल पर ही वापस राजस्थान हाई कोर्ट भेजने की तैयारी है। अरुण मोंगा ने वकालत की प्रैक्टिस 1991 में शुरू की थी। दिल्ली में करीब 20 साल तक वकालत करने के बाद 2018 में वह हाई कोर्ट के जज बने थे।

 

Jeevan Ayurveda Clinic

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here