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MP में पदोन्नति नियम 2025 जल्द होंगे लागू, दस दिन में शुरू होगी डीपीसी प्रक्रिया

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भोपाल 

 कैबिनेट से पदोन्नति नियम 2025 को मंजूरी मिलने से नौ वर्ष बाद अब अधिकारियों-कर्मचारियों के पदोन्नति की तैयारी प्रारंभ हो गई है। सबसे पहले मंत्रालय में अधिकारी-कर्मचारी पदोन्नत किए जाएंगे। इसके लिए सामान्य प्रशासन विभाग वरिष्ठता के हिसाब से सूची तैयार कर रहा है। प्रयास यही है कि जून में ही यह प्रक्रिया पूरी हो जाए। डेढ़ साल में दो बार पदोन्नति करने की तैयारी है।

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एक सप्ताह में अधिसूचित कर लागू होंगे नियम

पदोन्नति नियम एक सप्ताह में अधिसूचित कर लागू कर दिए जाएंगे। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि चूंकि नियम हमने तैयार किए हैं, इसलिए सबसे पहले इनका क्रियान्वयन भी हम ही कर रहे हैं। इससे सभी विभागों को प्रक्रिया भी समझ आ जाएगी। मंत्रालयीन सेवा संवर्ग में हर स्तर पर अधिकारियों-कर्मचारियों की पदोन्नति होगी। लगभग सभी कर्मचारी पदोन्नत होंगे। इसके लिए विभागीय पदोन्नति समिति बनाई जाएगी।

वरिष्ठता के आधार पर सूची तैयार होगी

दस पद हैं तो कुल 24 लोगों की एक जनवरी 2025 की स्थिति में वरिष्ठता के आधार पर सूची तैयार होगी। सेवा अभिलेख के आधार पर नए नियम से पात्रता निर्धारित कर पदोन्नति दी जाएगी। सूत्रों का कहना है कि अधिकतर कर्मचारी पदोन्नत पदों का वेतनमान प्राप्त कर रहे हैं, इसलिए इसमें कोई परेशानी भी नहीं होगी। पदोन्नति के लिए पदों की गणना संवर्ग के हिसाब से होगी।

पदोन्नति भी पहले आरक्षित पदों के लिए होगी

सबसे पहले अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए 20 और अनुसूचित जाति वर्ग के लिए 16 प्रतिशत पद अलग किए जाएंगे। पहले पदोन्नति भी आरक्षित पदों के लिए होगी। इसके बाद अनारक्षित पदों पर पदोन्नति की जाएगी। इसमें सभी कर्मचारी शामिल होंगे। प्रथम श्रेणी के पदों पर योग्यता सह वरिष्ठता और शेष पदों पर वरिष्ठता सह उपयुक्तता का फार्मूला रहेगा।

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अधीन होगी पदोन्नति प्रक्रिया
नई डीपीसी प्रक्रिया को सशर्त माना जाएगा, क्योंकि यह सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों के अंतिम निर्णय के अधीन होगी। जीएडी का कहना है कि कोर्ट में रिवर्ट के मामलों को लेकर भी सरकार अपना पक्ष रखेगी और कैविएट दाखिल करेगी, ताकि भविष्य में कोई निर्णय बिना पक्ष सुने न हो।

सभी विभागों को दी जाएगी ट्रेनिंग
जीएडी के अधिकारियों के अनुसार सबसे पहले सामान्य प्रशासन विभाग अपनी डीपीसी करेगा। इसके बाद अन्य विभागों के अधिकारियों को ट्रेनिंग दी जाएगी, जिसमें निम्न बिंदुओं की जानकारी दी जाएगी। पदों की गणना कैसे हो, नये नियमों के पैरा की व्याख्या, वर्गवार आरक्षण व्यवस्था का अनुपालन और मेरिट और सीनियरिटी के नियम के बारे में बताया जाएगा।

आरक्षित वर्ग को कैसे मिलेगा लाभ
अनुसूचित जाति (अजा) को 16 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति (अजजा) को 20 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान कैडर स्तर पर लागू होगा। यदि आरक्षित कोटे के पद भरे जा चुके हैं, तब पात्र अजा/अजजा वर्ग के व्यक्ति को अनारक्षित श्रेणी में स्थान मिल सकता है। भविष्य की डीपीसी में उस पद को आरक्षित कोटा में ही गिना जाएगा।

अनारक्षित वर्ग के लिए चयन प्रक्रिया
प्रत्येक पद के लिए दो गुना + 4 अभ्यर्थी बुलाए जाएंगे। जैसे 10 पद खाली हैं तो 24 लोग चयन प्रक्रिया में शामिल होंगे। पद भरने की प्राथमिकता में पहले अजजा, फिर अजा और अंत में अनारक्षित वर्ग को लिया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, पदोन्नति नियमों को अंतिम रूप देने से पहले 27 ड्राफ्ट तैयार किए गए थे। अंततः मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से चर्चा कर कैबिनेट द्वारा स्वीकृत नियम को अधिसूचित किया जाएगा। जीएडी का दावा है कि यह नया नियम सभी वर्गों को समान अवसर सुनिश्चित करता है।

आरक्षित पदों की संख्या हो जाएगी कम

नए नियम में सभी वर्गों के हितों का ध्यान रखा गया है। सूत्रों के अनुसार अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग को प्रदेश में शासकीय सेवाओं में जो आरक्षण निर्धारित है, वह पदोन्नति में भी मिलेगा यानी 36 प्रतिशत। शेष पद अनारक्षित वर्ग के रहेंगे। इसमें आरक्षित वर्ग भी शामिल रहता है। आरक्षित वर्ग के पद भरने के बाद अनारक्षित वर्ग में सभी शामिल होंगे। आरक्षित वर्ग के अधिकारी-कर्मचारी को अनारक्षित श्रेणी से पदोन्नति मिलने पर आगे संवर्ग की गणना में उन्हें आरक्षित कोटे का ही माना जाएगा और आगे चलकर उनकी संख्या कोटे में कम हो जाएगी।

पदोन्नति देने के लिए होगा प्रशिक्षण

'पदोन्नति की प्रक्रिया के संबंध में सभी विभागों के अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जाएगा। दरअसल, नए नियमों में कई प्रविधान किए गए हैं, जिसके बारे में सभी को बारी-बारी से बताया जाएगा। हम प्रयास कर रहे हैं कि जून में ही मंत्रालय संवर्ग के अधिकारियों-कर्मचारियों की पदोन्नति कर दी जाएगी। सितंबर-अक्टूबर में वर्ष 2026 के लिए फिर पदोन्नत करेंगे। इस प्रकार डेढ़ वर्ष में दो बार पदोन्नति हो जाएगी।'

– संजय दुबे, अपर मुख्य सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग, भोपाल

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