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भोपाल
मध्य प्रदेश के राजकीय पशु बारहसिंगा की संख्या अब 1,400 हो गई है। एक समय बारहसिंगा छत्तीसगढ़ के रायपुर, जगदलपुर से लेकर गुजरात के अहमदाबाद और महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले तक पाए जाते थे।
वर्ष 1964 में केवल 66 हार्ड ग्राउंड प्रजाति के बारहसिंगा ही कान्हा में बच गए थे। वर्ष 2010 के आसपास इनकी संख्या बढ़कर 250 हुई थी, अब यहां संख्या बढ़कर करीब 1000 हो गई है।
पुनर्वास अभियान सफल
विलुप्त होती इस प्रजाति को बचाने के लिए सतपुड़ा और बांधवगढ़ में पुनर्वास अभियान सफल रहा है। कान्हा टाइगर रिजर्व में बारहसिंगा विलुप्त न हो जाएं इसलिए सतपुड़ा को इनके अनुकूल मानते हुए यहां बसाने का निर्णय लिया गया।
इससे पहले वन विहार में कान्हा से बारहसिंगा लाकर बसाए गए। यहां मिली सफलता के बाद सतपुड़ा के बोरी में वर्ष 2015 में एन्क्लोजर बनाकर इसकी शिफ्टिंग की गई। वर्ष 2015 से 2023 तक 115 बारहसिंगा शिफ्ट किए गए। अब इनकी संख्या बढ़कर 300 हो गई है।
प्रदेश में दो प्रजातियां
बारहसिंगा की दो प्रजातियां बारहसिंगा की दो प्रजाति है। इनमें हार्ड ग्राउंड प्रजाति कान्हा राष्ट्रीय उद्यान जैसे सूखे घास के मैदानों और ठोस जमीनों पर रहती है। इसे भी दलदली भूमि पर रहना पसंद है इसलिए यह कुछ समय के लिए पानी में जाता है। वहीं वेटलैंड बारहसिंगा दलदली इलाकों में ही पाया जाता है।
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में बारहसिंगा मेगा पॉपुलेशन में 3 जगह पर है। इनकी जनसंख्या बढ़ाई जा सके इसके लिए सतपुड़ा में बारहसिंगा कॉरिडोर बना रहे हैं। 12 साल में अलग-अलग समय पर कान्हा से बारहसिंगा सतपुड़ा लाए गए। अब इनकी संख्या बढ़कर 300 हो गई है। इसी तरह कान्हा और बांधवगढ़ में भी बारहसिंगा की संख्या बढ़ी है।- राखी नंदा, क्षेत्र संचालक, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व









