Home अध्यात्म भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े ये 7 रहस्यमयी स्थान, आज भी कायम है...

भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े ये 7 रहस्यमयी स्थान, आज भी कायम है हजारों साल पुरानी आस्था

19
0
Jeevan Ayurveda

anjanikhabar:

 भगवान श्रीकृष्ण… एक ऐसा नाम, जिसमें आस्था है, अध्यात्म है और भारतीय सभ्यता की हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक चेतना भी समाई हुई है. हिंदू परंपरा में श्रीकृष्ण केवल एक आराध्य देव नहीं, बल्कि ऐसे विराट व्यक्तित्व हैं, जिनकी लीलाओं, विचारों और संदेशों ने भारतीय समाज और दर्शन पर गहरा प्रभाव छोड़ा है.

Ad

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने भारत के अलग-अलग हिस्सों में अनेक लीलाएं कीं. मथुरा की गलियों से लेकर वृंदावन के कुंजों तक, गोवर्धन पर्वत से लेकर समुद्र तट पर बसे द्वारका तक और कुरुक्षेत्र के युद्धक्षेत्र से लेकर गुजरात के प्रभास क्षेत्र तक, कई स्थान आज भी श्रीकृष्ण की स्मृतियों और मान्यताओं से जुड़े हुए हैं. इन स्थानों से जुड़ी कथाएं सदियों से भारतीय जनमानस का हिस्सा रही हैं. कहीं इन्हें धार्मिक आस्था का प्रतीक माना जाता है तो कहीं पुरातात्विक खोजों ने प्राचीन सभ्यताओं और बसावटों के नए संकेत दिए हैं. आइए जानते हैं भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े उन प्रमुख स्थानों और मान्यताओं के बारे में, जिनकी चर्चा आज भी इतिहास, पुरातत्व और आस्था के बीच होती है.

द्वारका: समुद्र किनारे बसी श्रीकृष्ण की नगरी
भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े सबसे रहस्यमय और चर्चित स्थानों में द्वारका का नाम प्रमुख है. गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में समुद्र तट पर स्थित द्वारका को धार्मिक ग्रंथों में भगवान श्रीकृष्ण की नगरी बताया गया है. मान्यता है कि मथुरा छोड़ने के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने समुद्र तट के पास द्वारका नगरी की स्थापना की थी. द्वारका का उल्लेख श्रीमद्भागवत महापुराण के अलावा महाभारत, हरिवंश पुराण, विष्णु पुराण और स्कंद पुराण जैसे प्राचीन ग्रंथों में भी मिलता है.

भागवत पुराण में द्वारका को समुद्र के भीतर बसाए गए एक भव्य और सुरक्षित नगर के रूप में वर्णित किया गया है. वहीं, महाभारत के मौसल पर्व में भगवान श्रीकृष्ण के पृथ्वी से प्रस्थान के बाद द्वारका के समुद्र में समा जाने का वर्णन मिलता है. धार्मिक कथाओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने अपने जीवन का एक लंबा समय द्वारका में बिताया और यहीं से यादव वंश के राज्य का संचालन किया था.

गोवर्धन पर्वत: जब श्रीकृष्ण ने उठाया था गिरिराज
भगवान श्रीकृष्ण की सबसे प्रसिद्ध लीलाओं में गोवर्धन धारण की कथा भी शामिल है. मथुरा से करीब 26 किलोमीटर दूर स्थित गोवर्धन पर्वत को श्रद्धालु गिरिराज महाराज के रूप में पूजते हैं. श्रीमद्भागवत महापुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों में वर्णित कथा के अनुसार, ब्रजवासी वर्षा के देवता इंद्र को प्रसन्न करने के लिए विशेष पूजा और यज्ञ किया करते थे. भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को इंद्र की बजाय गोवर्धन पर्वत और प्रकृति की पूजा करने का संदेश दिया.

ब्रजवासियों द्वारा इंद्र की पूजा बंद किए जाने से इंद्र क्रोधित हो गए. मान्यता है कि उन्होंने ब्रज क्षेत्र में मूसलाधार वर्षा शुरू करा दी. लगातार हो रही बारिश से जब ब्रज में संकट उत्पन्न हुआ, तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत को उठा लिया था.

कथा के अनुसार, ब्रजवासी और उनका गौवंश सात दिन और सात रात तक गोवर्धन पर्वत के नीचे सुरक्षित रहे. अंततः इंद्र को अपनी भूल का एहसास हुआ और उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से क्षमा मांगी. आज भी गोवर्धन की परिक्रमा करने के लिए देश-दुनिया से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं. श्रद्धालु गोवर्धन पर्वत को भगवान श्रीकृष्ण का स्वरूप मानते हैं और पूरी श्रद्धा के साथ इसकी परिक्रमा करते हैं.

निधिवन: जहां आज भी जीवित है रासलीला की मान्यता
वृंदावन स्थित निधिवन भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी सबसे रहस्यमय धार्मिक मान्यताओं में से एक है. यहां के बारे में श्रद्धालुओं का विश्वास है कि भगवान श्रीकृष्ण आज भी रात्रि के समय राधा रानी के साथ रासलीला करते हैं.

धार्मिक परंपराओं और ब्रज की लोकमान्यताओं में निधिवन का विशेष महत्व है. मान्यता है कि शाम की आरती के बाद निधिवन परिसर को खाली करा दिया जाता है और रात के समय यहां किसी को रुकने की अनुमति नहीं होती है. निधिवन परिसर में स्थित रंग महल से भी कई धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हैं. यहां प्रतिदिन भगवान के लिए माखन-मिश्री और अन्य सामग्री रखी जाती है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, सुबह मंदिर के पट खुलने पर वहां की व्यवस्था में परिवर्तन देखने को मिलता है.

हालांकि, ये बातें धार्मिक आस्था और स्थानीय परंपराओं का हिस्सा हैं और इन्हें वैज्ञानिक प्रमाण के रूप में नहीं देखा जाता. इसके बावजूद निधिवन आज भी श्रीकृष्ण भक्तों के लिए गहरी श्रद्धा और रहस्य का केंद्र बना हुआ है.

प्रभास क्षेत्र: जहां श्रीकृष्ण ने संवारी अपनी अंतिम लीला
भगवान श्रीकृष्ण के पृथ्वी पर अंतिम समय को लेकर भी धार्मिक ग्रंथों में विस्तार से वर्णन मिलता है. मान्यताओं के अनुसार, यदुवंश के विनाश के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी सांसारिक लीला को समाप्त करने का निर्णय लिया था.

धार्मिक कथा के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण एक वन में पीपल के पेड़ के नीचे विश्राम कर रहे थे. इसी दौरान जरा नाम के एक शिकारी ने उनके चरण को हिरण समझकर तीर चला दिया. बाद में जब उसे अपनी भूल का पता चला तो वह अत्यंत दुखी हुआ. मान्यता है कि इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने पृथ्वी से अपनी लीला संवरण की और अपने धाम को प्रस्थान किया. गुजरात के प्रभास क्षेत्र और वेरावल के पास स्थित देहोत्सर्ग तीर्थ को इस घटना से जोड़ा जाता है.

यह स्थान आज भी श्रद्धालुओं के लिए गहरी आस्था का केंद्र है. यहां भगवान श्रीकृष्ण के चरणों और उनके देहोत्सर्ग से जुड़ी धार्मिक स्मृतियों का दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.

मथुरा और वृंदावन: श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं की धरती
भगवान श्रीकृष्ण की कथा मथुरा के बिना अधूरी है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, मथुरा में ही देवकी और वसुदेव के घर श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था. इसके बाद उन्हें गोकुल पहुंचाया गया, जहां उनका पालन-पोषण यशोदा और नंद बाबा ने किया. गोकुल, वृंदावन और बरसाना से श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, गोचारण, माखन चोरी और रासलीला की अनगिनत कथाएं जुड़ी हुई हैं.

आज भी ब्रज क्षेत्र का पूरा सांस्कृतिक जीवन श्रीकृष्ण भक्ति के रंग में रंगा हुआ दिखाई देता है. जन्माष्टमी, होली, राधाष्टमी और अन्य पर्वों के दौरान यहां की छटा विशेष रूप से देखने लायक होती है.

प्रभास क्षेत्र: जहां श्रीकृष्ण ने संवारी अपनी अंतिम लीला
भगवान श्रीकृष्ण के पृथ्वी पर अंतिम समय को लेकर भी धार्मिक ग्रंथों में विस्तार से वर्णन मिलता है. मान्यताओं के अनुसार, यदुवंश के विनाश के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी सांसारिक लीला को समाप्

Jeevan Ayurveda Clinic

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here