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उभरता उत्तर प्रदेश: वैश्विक निवेश की नई धुरी
गोरखपुर
“मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जापान दौरे से 'यूपी-जापान निवेश सम्मेलन 2026' तक का सफर बताता है कि जब कोई सरकार राज्य के विकास के लिए साफ नीयत व स्पष्ट नीति के साथ कदम बढ़ाती है तो नतीजा उन्नति का नया सवेरा लेकर ही आता है।”
कभी देश के औद्योगिक मानचित्र पर हाशिए पर रहने वाला उत्तर प्रदेश आज वैश्विक निवेशकों के लिए पहली पसंद बनता जा रहा है, तो इसमें अचरज की कोई बात नहीं है। क्योंकि 25 करोड़ की विशाल आबादी वाला यह राज्य अब केवल जनसंख्या के आधार पर नहीं, बल्कि अपनी आधुनिक अवसंरचना, सुदृढ़ कानून-व्यवस्था, और वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के स्पष्ट रोडमैप के कारण पहचाना जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सफल जापान दौरे और वर्तमान में जारी 'यूपी-जापान निवेश सम्मेलन 2026' ने यह साबित कर दिया है कि उत्तर प्रदेश ने खुद को वैश्विक पूंजी और तकनीक के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार कर लिया है।
भरोसे और रणनीतिक साझेदारी की नींव
फरवरी 2026 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जापान दौरे ने उत्तर प्रदेश और जापान के ऐतिहासिक व सांस्कृतिक संबंधों को एक नए आर्थिक आयाम में बदल दिया। टोक्यो रोड शो के दौरान जापानी उद्योगपतियों और टेक-दिग्गजों से मुलाकात कर मुख्यमंत्री ने राज्य के मेक-इन-यूपी विजन को प्रस्तुत किया। इस दौरान जापानी कंपनियों के साथ करीब एक लाख करोड़ के एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए, जबकि ₹1.5 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। कुबोटा, स्पार्क मिंडा, टोयो डेंसो व नागासे जैसी दिग्गज जापानी कंपनियों ने एग्रीकल्चरल मशीनरी, ऑटोमेशन, रोबोटिक्स और सेमीकंडक्टर सेक्टर में निवेश की प्रतिबद्धता जताई। यामानाशी विश्वविद्यालय के साथ मिलकर आईआईटी कानपुर, आईआईटी बीएचयू और एचबीटीयू के सहयोग से 'ग्रीन हाइड्रोजन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' की स्थापना पर सहमति बनी। जापानी निवेशकों की सुविधा के लिए उत्तर प्रदेश सरकार नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) के निकट यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्र में 500 एकड़ भूमि पर विशेष 'जापान सिटी' विकसित कर रही है। यह एकीकृत औद्योगिक टाउनशिप जापानी कंपनियों और उनके सप्लायर्स के लिए एक प्लग-एंड-प्ले प्लेटफॉर्म की तरह काम करेगी।
वैश्विक निवेश का 'हब' कैसे बना उत्तर प्रदेश?
जापान दौरे की सफलता के बाद दिल्ली-एनसीआर में आयोजित हो रहा 'यूपी-जापान निवेश सम्मेलन 2026' (18-23 अगस्त) दोनों पक्षों के बीच व्यापारिक रिश्तों को धरातल पर उतारने का काम कर रहा है। इसमें 200 से अधिक शीर्ष जापानी प्रतिनिधि, सीईओ और नीति निर्माता भाग ले रहे हैं। उत्तर प्रदेश का यह आर्थिक रूपांतरण रातों-रात नहीं हुआ है। इसके पीछे दूरदर्शी नीतियां, कनेक्टिविटी और बेहतर शासन मॉडल है। 'जीरो टॉलरेंस' पर आधारित लॉ एंड ऑर्डर नीति ने राज्य में अपराधियों के खौफ को खत्म कर निवेशकों को सुरक्षा का भरोसा दिया है। सिंगल विंडो पोर्टल 'निवेश मित्र', सेक्टर-विशिष्ट नीतियों, और एमएसएमई इकाइयों के लिए 1000 दिनों तक कई एनओसी से छूट जैसे कदमों ने प्रदेश में लालफीताशाही को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है।
विश्वस्तरीय एक्सप्रेसवे और लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी
देश के कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क का 60%हिस्सा अब यूपी में है। 17 चालू/प्रस्तावित घरेलू एयरपोर्ट्स, 5 अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे, देश का सबसे बड़ा रेल नेटवर्क, ईस्टर्न व वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का जंक्शन, और देश का पहला इनलैंड वाटरवे (वाराणसी) यूपी को एक मजबूत लॉजिस्टिक्स पावरहाउस बनाते हैं। यही वजह है कि आज यूपी के पास भारत का 55 फीसदी मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग और 60 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट उत्पादन का आधार है। 96 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयां और एक विशाल युवा कार्यबल जापानी निवेशकों को निर्माण से लेकर खपत तक एक संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) प्रदान करते हैं।
वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था में निर्णायक
'बीमारू' राज्य के ठप्पे को पीछे छोड़ते हुए उत्तर प्रदेश आज भारत के विकास का सबसे बड़ा ग्रोथ इंजन बनकर उभरा है। पिछले 9 वर्षों में राज्य का बजट, जीएसडीपी और प्रति व्यक्ति आय लगभग तीन गुना बढ़ चुकी है। जापान और उत्तर प्रदेश के बीच का संबंध केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और बौद्ध विरासत का भी है। भगवान बुद्ध की कर्मभूमि—सारनाथ, कुशीनगर, श्रावस्ती, और कपिलवस्तु—का विकास 'बुद्ध सर्किट' के रूप में करके राज्य ने जापानी पर्यटकों और आध्यात्मिक निवेशकों के साथ एक आत्मीय भावनात्मक संबंध गढ़ा है।
यह केवल निवेश का आगमन नहीं। यह जापानी टेक्नोलॉजी व प्रिसिजन का यूपी के स्केल व स्पीड के साथ एक ऐतिहासिक संगम है। आज उत्तर प्रदेश ने यह साबित कर दिखाया है कि स्थिर सरकार, पारदर्शी नीतियों, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षित माहौल के बल पर किसी भी क्षेत्र को दुनिया की अग्रणी आर्थिक जमीन के रूप में स्थापित किया जा सकता है। आने वाले दिनों में दुनिया के अन्य शीर्ष औद्योगिक देशों के प्रतिनिधिमंडल यदि उत्तर प्रदेश में दौरा करते दिखाई दें तो यह हैरत की बात नहीं होगी।
-प्रोफेसर शिववर्धन पाठक, पूर्व विभागाध्यक्ष वाणिज्य संकाय, दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय









