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‘हमारे PM भीख का कटोरा लेकर चीन नहीं गए’, बांग्लादेश के विदेश मंत्री का बड़ा बयान

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ढाका 

अक्सर 'भीख का कटोरा' की चर्चा पाकिस्तान के संदर्भ में होती है, पाकिस्तान अमूमन दुनिया भर से मदद मांगने के लिए जाता रहता है. लेकिन इस बार ये चर्चा बांग्लादेश को लेकर हो गई. चर्चा भी ऐसी हुई कि बांग्लादेश के विदेश मंत्री बुरा मान गए. दरअसल बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के चीन दौरे पर एक अजीब विवाद पैदा हो गया है. मीडिया की ओर से बार बार चीन से मिलने वाली आर्थिक मदद पर सवाल पूछने पर बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने चिढ़ते हुए कहा कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान चीन कोई भीख का कटोरा लेकर नहीं गए हैं. वे वहां दोनों देशों के बीच संबंधों की दशा-दिशा तय करने गए हैं। 

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बांग्लादेश के विदेश मंत्री पीएम के दौरे पर ढाका में पत्रकारों से बात कर रहे थे. उन्होंने कहा कि किसी भी देश का नेता 'भीख का कटोरा' लेकर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में शामिल नहीं होते हैं। 

बीजिंग से मिलने वाली सीधी प्रोजेक्ट सहायता के बारे में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए विदेश मंत्री ने कहा, "आपने नकद राशि मिलने की बात की. भाइयों, कृपया ऐसे सवाल न पूछें; इससे हमें बहुत शर्मिंदगी होती है। 

"प्रधानमंत्री दोनों देशों के बीच संबंधों की दिशा, विषय-वस्तु, कद, दायरा और गहराई तय करने के लिए वहां गए थे. सरकार का कोई भी प्रमुख दूसरे देश के नेता के साथ कागज और पेंसिल लेकर नहीं बैठता और न ही वे कोई भीख का कटोरा लेकर जाते हैं. कृपया थोड़ी आत्म-सम्मान बनाए रखें। 

खलीलुर ने ये बातें  विदेश मंत्रालय में आयोजित एक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहीं, जो प्रधानमंत्री की हालिया मलेशिया और चीन यात्राओं के संबंध में थी। 

बता दें कि बांग्लादेश के 13वें संसदीय चुनाव में भारी जीत के बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी  की सरकार के मुखिया तारिक अपनी पहली विदेश यात्रा पर निकले और 21 जून को मलेशिया पहुंचे. अगले दिन वह उत्तर-पूर्वी चीन के शहर डालियान गए। 

वहाां वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम की सालाना बैठक में शामिल होने के बाद, वह तीन दिन की राजकीय यात्रा शुरू करने के लिए बुधवार को बीजिंग पहुंचे। 

इस यात्रा के दौरान तारिक ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रीमियर ली कियांग के साथ उच्च-स्तरीय द्विपक्षीय बातचीत की. ढाका और बीजिंग ने अलग-अलग क्षेत्रों में 17 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं। 

दोनों देशों के  बीच 13 समझौते पर हस्ताक्षर हुए.  इनमें तीस्ता नदी मास्टर प्लान, तकनीकी सहायता के लिए चीन का समर्थन.  मोंगला पोर्ट और अनवारा के पास आर्थिक क्षेत्र का विकास. बुनियादी ढांचा जिनमें सड़कें, पुल, रेलवे, ऊर्जा, पर्यावरण-अनुकूल विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा और मानव संसाधन विकास में सहयोग शामिल है। 

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