गर्मी का मौसम आते ही चेहरे पर पसीना, चिपचिपाहट और ड्राइनेस जैसी परेशानियां शुरू हो जाती हैं. पसीने से होने वाली चिपचिपाहट के कारण कई लोगों को लगता है कि गर्मियों में मॉइश्चराइजर लगाने की जरूरत नहीं होती, लेकिन सच इससे उलट है. दरअसल, तेज धूप और गर्म हवा स्किन की नमी छीन लेती है. ऐसे में गर्मियों में भी मॉइश्चराइजर लगाना बहुत जरूरी होता है. सही मॉइश्चराइजर स्किन को मुलायम और फ्रेश बनाए रखने में मदद करता है.
लेकिन अगर आप सोचते हैं कि जो मॉइश्चराइजर आपने सर्दियों में लगाया था, वही आप गर्मी में भी लगा सकते हैं तो आप गलत हैं. खास बात ये है कि गर्मियों में हल्के और नॉन-स्टिकी मॉइश्चराइजर ज्यादा अच्छे माने जाते हैं. आज हम आपको ऐसे 4 तरह के मॉइश्चराइजर के बारे में बताएंगे जो गर्मी में आपकी स्किन को हाइड्रेटेड रखने में मदद कर सकते हैं.
जेल बेस्ड मॉइश्चराइजर
अगर आपकी स्किन ऑयली या कॉम्बिनेशन है, तो गर्मियों में आपके लिए जेल बेस्ड मॉइश्चराइजर अच्छा ऑप्शन हो सकता है. ये स्किन पर भारी महसूस नहीं होता और जल्दी एब्जॉर्ब हो जाता है. इससे चेहरा चिपचिपा नहीं लगता और स्किन को ठंडक भी मिलती है. एलोवेरा या हायल्यूरोनिक एसिड वाले जेल मॉइश्चराइजर गर्मियों में काफी पसंद किए जाते हैं.
वॉटर बेस्ड मॉइश्चराइज़र
गर्मी के मौसम में वॉटर बेस्ड मॉइश्चराइजर स्किन को हल्का और फ्रेश महसूस कराने में मदद करते हैं. ये स्किन में नमी बनाए रखते हैं लेकिन ऑयल नहीं बढ़ाते. जिन लोगों को पसीना ज्यादा आता है, उनके लिए ऐसे मॉइश्चराइजर काफी फायदेमंद हो सकते हैं. इन्हें लगाने के बाद चेहरा ज्यादा भारी भी नहीं लगता.
विटामिन-ई वाला मॉइश्चराइजर
धूप और गर्मी की वजह से स्किन अक्सर गर्मियों बेजान और रूखी दिखने लगती है. ऐसे में विटामिन-ई वाले मॉइश्चराइजर स्किन को पोषण देने का काम करते हैं. ये स्किन को मुलायम रखने के साथ-साथ ड्राइनेस कम करने के लिए भी असरदार माने जाते हैं. अगर आपकी स्किन जल्दी फटने या छिलने लगती है, तो विटामिन-ई वाले मॉइश्चराइजर आपके लिए अच्छा ऑप्शन हो सकता है.
SPF वाला मॉइश्चराइजर
गर्मियों में ऐसा मॉइश्चराइजर चुनना ज्यादा बेहतर माना जाता है जिसमें SPF भी मौजूद हो. इससे स्किन को धूप की हानिकारक किरणों से बचाने में मदद मिलती है. SPF वाला मॉइश्चराइजर लगाने से कई बार सनस्क्रीन लगाने की जरूरत भी कम हो जाती है. बाहर निकलने से पहले इसे लगाना फायदेमंद हो सकता है.









