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बैरियर-फ्री सिस्टम शुरू, रोक-टोक खत्म: अब 100 KM की स्पीड पर कटेगा टोल

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नई दिल्ली

देश में हाईवे यात्रा को आसान और तेज बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम उठाया गया है. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने गुजरात के सूरत-भरूच NH-48 सेक्शन पर स्थित चोरयासी (चोर्यासी) टोल प्लाजा पर देश के पहले मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) बैरियर-लेस टोलिंग सिस्टम की शुरुआत की. ये पहल भारत के टोलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह डिजिटल और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव साबित होगी। 

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इस नई तकनीक के तहत अब टोल प्लाजा पर गाड़ियों को रुकने या धीमा करने की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी. वाहन हाईवे की सामान्य गति (100 किमी प्रति घंटा या उससे अधिक) से गुजरते हुए ही टोल का भुगतान कर सकेंगे. सिस्टम में ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरों, हाई-स्पीड RFID रीडर्स और अपडेटेड FASTag तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. ओवरहेड गैंट्री पर लगे कैमरे वाहन के नंबर प्लेट को कैप्चर करते हैं, FASTag से जुड़ी जानकारी पढ़ते हैं और बैकएंड सिस्टम से ऑटोमैटिक टोल की कटौती हो जाती है। 
प्लाज़ा पर समय बचेगा

सरकार का मानना है कि इस सिस्टम से यात्रा का समय कम होगा, हाईवे पर लगने वाला जाम घटेगा और ईंधन की बचत भी होगी. इसके साथ ही गाड़ियों से होने वाला प्रदूषण भी कम होगा और टोल प्रक्रिया में मानवीय दखल भी घटेगा. पारंपरिक टोल प्लाजा में गाड़ियां रुकने के कारण इंजन चलता रहता है, जिससे अनावश्यक ईंधन खपत और कार्बन उत्सर्जन बढ़ता है। 

गडकरी ने क्या कहा?
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ये कदम आम लोगों के लिए Ease of Living को बेहतर बनाएगा और व्यापार के लिए Ease of Doing Business को भी बढ़ावा देगा. इससे माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को भी गति मिलेगी. उन्होंने ये भी कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार देश में वर्ल्ड-क्लास और टेक्नोलॉजी आधारित नेशनल हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के लिए लगातार काम कर रही है। 

ये नई पहल भारत के टोलिंग सिस्टम को डिजिटल और आधुनिक बनाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है, जिससे आने वाले समय में हाईवे यात्रा और भी ज्यादा आसान और सुविधाजनक हो जाएगी. सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2026 के अंत तक कई और प्रमुख टोल प्लाजाओं को बैरियर-फ्री बनाने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाए. इससे न केवल यात्री सुविधा बढ़ेगी बल्कि भारत विश्व स्तर पर आधुनिक हाईवे मैनेजमेंट का एक बेहतरीन उदाहरण भी बनेगा। 

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