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तुर्की और सीरिया में विनाशकारी भूकंप हर तरफ लाशों का ढेर, 4300 से ज्यादा मौतें

अंकारा

 तुर्की और सीरिया में सोमवार को आए जलजले ने अब तक 4300 लोगों की जान ले ली है। तीन बड़े भूकंप के बाद तुर्की और सीरिया में तबाही का माहौल है। रिक्‍टर स्‍केल पर 7.8, 7.6 और 6 की तीव्रता वाले भूकंप के बाद हर तरफ लाशों का ढेर लगा हुआ है। न्‍यूज एजेंसी एपी की तरफ से बताया गया है कि हजारों लोग घायल हैं और इमारतों के मलबे में अपनों की तलाश जारी है। भारत समेत दुनिया के कई देशों की तरफ से राहत सामग्री रवाना कर दी गई है।

तुर्की में सोमवार सुबह 04:17 बजे भूकंप आया था. इसकी गहराई जमीन से 17.9 किलोमीटर अंदर थी. भूकंप का केंद्र गाजियांटेप के पास था. यह सीरिया बॉर्डर से 90 किमी दूर स्थित है. ऐसे में सीरिया के कई शहरों में भी भूकंप के तेज झटके महसूस किए. यह तुर्की में 100 साल में सबसे तीव्रता वाला भूकंप बताया जा रहा है.  US Geological Survey के मुताबिक, भूकंप के बाद 77 झटके लगे. इनमें से एक झटका 7.5 तीव्रता का था. जबकि एक झटका 6.0 तीव्रता का था. इन सारे झटकों का केंद्र गाजियांटेप से 80 किमी के दायरे में था.

तुर्की और सीरिया में 4360 मौतें

तुर्की और सीरिया में सोमवार को आए भूकंप के बाद तबाही जारी है. दोनों देशों में अब तक 4360 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. भूकंप की तीव्रता 7.8 थी. भूकंप के चलते कंपन इतना तेज था कि हजारों इमारतें ताश के पत्तों की तरह भरभराकर गिर गईं. तुर्की प्रशासन का कहना है कि अभी तक 5606 इमारतें गिर चुकी हैं. तबाही का यही मंजर सीरिया में भी देखने को मिला है.
 
15000 से ज्यादा जख्मी

तुर्की और सीरिया में अब तक 4360 लोगों की जान गई है. जबकि 15000 से ज्यादा लोग जख्मी हैं. तुर्की नें 5600 से ज्यादा इमारतें भूकंप से तबाह हुई हैं. अकेले तुर्की में 2900 लोगों के मारे जाने की खबर है. जबकि सीरिया में सरकार द्वारा नियंत्रित इलाके में 711 और विद्रोहियों के नियंत्रण वाले इलाके में 740 लोगों की मौत हुई है. सीरिया में 3531 लोग, जबकि तुर्की में 14483 लोग जख्मी हैं.
 
खराब मौसम की वजह से रेस्क्यू में आ रही दिक्कतें

तुर्की के स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि मौसम और आपदा का दायरा रेस्क्यू टीमों के लिए चुनौतियां पैदा कर रही हैं. खराब मौसम के चलते रेस्क्यू टीम के हेलिकॉप्टर भी उड़ान नहीं भर पा रहे हैं. इतना ही नहीं हाल ही में तुर्की और सीरिया के कई इलाकों में भारी बर्फबारी हुई है. इसके चलते तापमान में भी गिरावट आई है.

तुर्की में क्यों आता है बार-बार भूकंप?

तुर्की का ज्यादातर हिस्सा एनाटोलियन प्लेट पर है.  इस प्लेट के पूर्व में ईस्ट एनाटोलियन फॉल्ट है. बाईं तरफ ट्रांसफॉर्म फॉल्ट है. जो अरेबियन प्लेटके साथ जुड़ता है. दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम में अफ्रीकन प्लेट (African Plate) है. जबकि, उत्तर दिशा की तरफ यूरेशियन प्लेट है, जो उत्तरी एनाटोलियन फॉल्ट जोन से जुड़ा है. घड़ी के विपरीत दिशा में घूम रही है एनाटोलियन टेक्टोनिक प्लेट तुर्की के नीचे मौजूद एनाटोलियन टेक्टोनिक प्लेट घड़ी के विपरीत दिशा में घूम रहा है. यानी एंटीक्लॉकवाइज. साथ ही इसे अरेबियन प्लेट धक्का दे रही है. अब ये घूमती हुई एनाटोलियन प्लेट को जब अरेबियन प्लेट धक्का देती है, तब यह यूरेशियन प्लेट से टकराती है. तब भूकंप के तगड़े झटके लगते हैं.

सात दिनों का राष्‍ट्रीय शोक
पहला भूकंप तुर्की के गजियानटेप प्रांत के करीब नूरदागी में आया जो सीरिया के बॉर्डर पर है। दूसरा भूकंप एकिनोझाहू में आया जो कहारनमारस के पास है और तीसरा भूकंप गोकसन में आया जो इसी प्रांत में पड़ता है। इस विनाशकारी भूकंप के बाद राष्‍ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगान की तरफ से सात दिनों का राष्‍ट्रीय शोक घोषित किया गया है। इस दौरान पूरे देश में और दूसरे देशों में इसके दूतावासों पर तुर्की के झंडों को आधा झुकाया रखा जाएगा। मंगलवार को तुर्की और सीरिया में भूकंप के बाद झटकों के आने का सिलसिला जारी है। 24 घंटे में यहां पर कई झटके आ चुके हैं जिनके बाद लोगों में दहशत का माहौल है।

आठ गुना ज्‍यादा तबाही!
विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (WHO) की तरफ से कहा गया है कि भूकंप की वजह से दोनों देशों में मृतकों का आंकड़ा 20,000 तक पहुंच सकता है। संगठन के एक सीनियर इमरजेंसी ऑफिसर कैथरीन स्‍मॉलवुड की मानें तो अभी तबाही की पूरी तस्‍वीर नहीं आई है और शुरुआती आंकड़ों की तुलना में यह आठ गुना ज्‍यादा हो सकती है। यानी हो सकता है कि तुर्की और सीरिया में भूकंप से करीब 35 हजार लोगों की जान चली गई हो। विशेषज्ञों के मुताबिक तीन बड़े झटकों के अलावा अब तक 100 से ज्‍यादा झटके आ चुके हैं। पूरी दुनिया ने तुर्की और सीरिया के लिए राहत सामग्री भेजनी शुरू कर दी है।

1999 में भी आया ऐसा भूकंप
तुर्की और सीरिया के इस भूकंप ने दक्षिण-पूर्वी प्रांत के कहारनमारस प्रांत में जमकर तबाही मचाई लेकिन इसका असर लेबनान की राजधानी बेरूत के अलावा दमिश्‍क में भी देखा गया। मिस्र तक नागरिकों में दहशत देखी गई। साल 1999 में तुर्की में ऐसा ही भूकंप आया था जिसमें 18,000 लोगों की मौत हो गई थी।भारत के अलावा यूके, यूरोपियन यूनियन, रूस, अमेरिका, जॉर्डन, मैक्सिको, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों ने तुर्की की मदद के लिए हाथ बढ़ाए हैं।

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