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बजट से उम्मीदेंः शिक्षा क्षेत्र में बना रहेगा खर्च में बढ़ोतरी का रुझान, लैंगिक समानता और नए संस्थानों के लिए

 नई दिल्ली 

बजट में शिक्षा पर कुल खर्च में बढ़ोतरी की उम्मीद है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 ने शिक्षा पर सार्वजनिक निवेश को सकल घरेलू उत्पाद का छह फीसदी करने पर जोर दिया है। इस दिशा में अभी लंबी दूरी तय करनी है, लेकिन विभिन्न शिक्षा योजनाओं और सुधारों के लिहाज से आम बजट काफी सकारात्मक होगा। सूत्रों ने कहा कि बजट में हर वर्ष शिक्षा पर खर्च बढ़ने का रुझान इस बार भी बना रहेगा। कुल बढ़ोतरी 10 से 12 फीसदी के बीच रह सकती है।

यह भी उम्मीद है कि सरकार शैक्षिक सेवाओं पर जीएसटी को कम करने का फैसला कर सकती है। कोविड के दौरान लगे झटके से उबरने के लिए इस तरह की मांग की गई है। समग्र शिक्षा अभियान, शिक्षक प्रशिक्षण, डिजिटलीकरण के साथ राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत प्रस्तावित सुधारों के लिए आवंटन बढ़ाया जा सकता है। सूत्रों ने कहा, डिजिटल विश्वविद्यालय के अलावा ऑनलाइन शिक्षा के लिए बजट में विशेष प्रावधान देखने को मिल सकता है। जानकारों का मानना है कि डिजिटल शिक्षा के जरिए कई भारतीय भाषाओं और आईसीटी प्रारूपों में शिक्षा प्रदान करने की योजना को गति मिल सकती है।
 
सरकार ने सकल नामांकन दर बढ़ाने के मकसद से उच्च शिक्षा को भी प्रोत्साहित करने का मन बनाया है। रिसर्च और नवाचार को बढ़ावा देने के अलावा ऑनलाइन और हाइब्रिड माध्यम से डिग्री के लिए विदेशी संस्थानों के साथ औपचारिक शिक्षा के लिए भी पर्याप्त बजटीय प्रावधान किया जा सकता है। सरकार बालिका शिक्षा के लिए भी अतिरिक्त धनराशि आवंटित करेगी, ताकि शिक्षा में लैंगिक समानता सुनिश्चित की जा सके। सूत्रों ने कहा कि सरकार एक तरफ स्कूली शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए आधारभूत ढांचा का विस्तार करेगी। नए संस्थान खोलने पर जोर होगा। पब्लिक प्राइवेट भागीदारी का विस्तार होगा। वहीं उच्च शिक्षा में नामांकन बढ़ाने और गुणवत्ता युक्त शिक्षा के लिए भी खर्च बढ़ाया जाएगा।

सरकार उच्च शिक्षा प्रणाली में 3.4 करोड़ अतिरिक्त छात्रों तक पहुंचकर 2035 तक उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) को 50 प्रतिशत तक बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है। इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए निजी संस्थानों की भूमिका अहम है, फिर भी, उन्हें मिलने वाला समर्थन न्यूनतम है। उच्च शिक्षा क्षेत्र में जो 3.5 करोड़ सीटें बढ़ने की उम्मीद है, उनमें से अधिकांश निश्चित रूप से निजी क्षेत्र से होंगी। इसलिए निजी क्षेत्र ने कई तरह की छूट की उम्मीद बजट से जताई है। भौतिक अवसंरचना, संकाय विकास, अनुसंधान और नवाचार, और प्रौद्योगिकी-सक्षम शिक्षा के विस्तार के लिए बजटीय प्रोत्साहन देखने को मिल सकता है।

बढ़ सकता आवंटन

शिक्षा बजट बीते कई वर्षों से धीरे-धीरे बढ़ोतरी की राह पर है। वित्तीय वर्ष 2022-2023 में शिक्षा क्षेत्र के लिए 1.04 लाख करोड़ रुपए आवंटित किए गए थे। शिक्षा क्षेत्र के लिए बजट आवंटन कुल वित्त पोषण का केवल 2.6 प्रतिशत था। इसमें उच्च शिक्षा के लिए 40828.35 करोड़ रुपए निर्धारित किए गए थे, जबकि स्कूली शिक्षा के लिए 63449.37 रुपए का फंड दिया गया। अब इसे कम से कम तीन से साढ़े तीन फीसदी तक ले जाने की उम्मीद है।
 

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