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जिला चिकित्सालय में नि:शुल्क डायलिसिस सुविधा से मरीजों को बड़े खर्च से मिल रही राहत

कोरिया

कोरिया जैसे वनांचल क्षेत्र में नि:शुल्क डायलिसिस की सुविधा आम जन के लिए बेहद मददगार है। जिला चिकित्सालय बैकुंठपुर में 5 मशीनों के जरिये लोगों को डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध है। अब तक 05 मशीनों के माध्यम से लगभग 965 नि:शुल्क डायलिसिस किए गए। गौरतलब है कि शासन द्वारा जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है। इसी कड़ी में किडनी सम्बन्धी बीमारियों से ग्रसित मरीजों के लिए जिला अस्पताल बैकुण्ठपुर में संचालित नि:शुल्क डायलिसिस की सुविधा वरदान बनकर उभरी है।

जिला चिकित्सालय में वर्ष 2020 में 01 डायलिसिस मशीन की स्थापना की गई। इसके बाद सितंबर 2022 में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार करते हुए 04 नवीन मशीनों की स्थापना जिला चिकित्सालय में हुई। जहां पहले डायलिसिस के लिए मरीजों को जिले से बाहर जाकर महंगे खर्च करने पड़ते थे, वहीं आज जिले में ही एक दिन में ही 10 मरीज तक को सुविधा देने में जिला चिकित्सालय सक्षम है।

डायलिसिस हेतु चिकित्सालय में भर्ती 64 वर्षीय अब्दुल जलील के परिजन ने बताया कि वे लगातार जिला अस्पताल में डायलिसिस हेतु आ रहें हैं, पहले डायलिसिस कराने जाने के लिए बहुत सोचना पड़ता था, खर्चे संभालने पड़ते थे। आना-जाना फिर अस्पताल में चिकिस्ता का खर्च, बहुत हो जाता था, अब शासन-प्रशासन द्वारा यहां नि:शुल्क डायलिसिस सुविधा ने हमें राहत दी है। इसी प्रकार एक अन्य मरीज के परिजन ने बताया कि पहले डायलिसिस हेतु वे अम्बिकापुर जाते थे जहां फीस के साथ आने-जाने का खर्च ही 5 हजार से 6 हजार तक हो जाता था, यहां नि:शुल्क डायलिसिस से उन्हें काफी लाभ मिला है।

जिला चिकित्सालय में अप्रैल 2021 से अब तक मेजर आॅपरेशन श्रेणी में जनरल एवं स्पाइनल एनेस्थेसिया से संबंधित 900 से ज्यादा मरीजों को इलाज का लाभ मिल, जिसमें आॅर्थाे, जनरल, सीटीटी, तथा ईएनटी यानी कान, नाक और गला संबंधी सर्जरी शामिल हैं। इसी तरह लगभग 530 माइनर आॅपेरशन में भी लोगों का इलाज किया गया है। एसएनसीयू यानी नवजात बच्चों के लिए विशेष देखभाल की यूनिट। इस यूनिट में उन नवजात बच्चों की विशेष देखभाल की जाती है, जो बीमार हो जाते हैं या जन्म के समय बीमार पड़ जाते हैं। जिला चिकित्सालय में स्थापित इस यूनिट के माध्यम से 1800 से ज्यादा बच्चों को विशेष नवजात शिशु देखभाल यूनिट में भर्ती किया गया और उन्हें चिकित्सकों और मेडिकल स्टाफ की देखरेख में सफल चिकित्सा मुहैया कराई गई।

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