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कर्नाटक में नाटक का डर? भाजपा के सामने 2023 की पहली चुनौती, थामनी होगी बगावत

 कर्नाटक

नए साल की शुरुआत के साथ ही भाजपा के लिए नई सियासी चुनौतियां भी सामने आ गई हैं। गुजरात और हिमाचल विधानसभा चुनावों में एक राज्य खोकर साल का अंत देखने वाली भाजपा को पहली चुनावी जंग कर्नाटक में लड़नी होगी। यहां मई में चुनाव होने वाले हैं और इसके बाद मध्य प्रदेश, राजस्थान एवं छत्तीसगढ़ के चुनाव नवंबर में होंगे। ऐसे में इस राज्य का नतीजा दूसरे इलाकों में भाजपा के मनोबल को तय करेगा। कर्नाटक में बीएस येदियुरप्पा को हटाकर बोम्मई को सीएम बनाने वाली भाजपा के सामने चुनौती होगी कि वह ऐंटी-इनकम्बैंसी से निपटे और अपने पुराने नेताओं की बगावत का भी सामना करे। 

यहां भाजपा ने दिग्गज लिंगायत नेता बीएस येदियुरप्पा से कमान लेकर उसने बसवराज बोम्मई को सीएम बनाया है। ऐसे में यह चुनाव बताएगा कि उसका दांव कितना सफल रहा है और नया चेहरा किस हद तक कर्नाटक की राजनीति में स्थापित हो पाया है। बीएस येदियुरप्पा को सीएम पद से हटाने के बाद पार्टी ने उन्हें अपनी शीर्ष संस्था संसदीय बोर्ड में शामिल किया है। फिर भी उनके समर्थक रहे कई नेता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। ऐसे में बोम्मई सरकार और भाजपा के सामने चुनौती होगी कि वह बागियों को भी थामे और ऐंटी-इनकम्बैंसी का सामना भी करे। 

हिमाचल का सबक भाजपा के लिए जरूरी, मुश्किल बन सकते हैं बागी

खासतौर पर हिमाचल प्रदेश का उदाहरण उसके सामने होगा, जहां वह बेहद करीबी अंतर से हार गई। इसकी वजह यही थी कि भाजपा से तो वह लड़ती दिखी, लेकिन दो दर्जन सीटों पर उसके बागियों ने खेल बिगाड़ दिया। कर्नाटक में ऐसा न हो, इसे भाजपा को संभालना होगा। कर्नाटक भाजपा में लगातार कैबिनेट विस्तार की मांग भी होती रही है। ऐसे में इस बात की भी अटकलें हैं कि चुनाव से पहले कुछ नेताओं को मंत्री परिषद में जगह देकर संतुष्ट किया जा सकता है। केंद्रीय नेतृत्व को उम्मीद है कि वह येदियुरप्पा के अनुभव और नई लीडरशिप के जोश के भरोसे कांग्रेस एवं जेडीएस को हरा सकेगी। 

भाजपा ने बताया- उसे किससे है कर्नाटक में उम्मीद

भाजपा के एक सीनियर नेता ने कहा कि कर्नाटक में हमारे पास बढ़त है। हमारे मुख्यमंत्री बोम्मई की इमेज एक आम आदमी की है। इसके अलावा येदियुरप्पा जी हमारे सबसे बड़े और लोकप्रिय नेता हैं। दोनों मिलकर भाजपा को मजबूत करेंगे। वह कहते हैं कि भाजपा के खिलाफ ऐंटी-इनकम्बैंसी की भी स्थिति नहीं है क्योंकि दूसरे दलों से लगातार लोग जॉइन कर रहे हैं।
 

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