आदिवासी हेरिटेज शराब: सभी तरह की अनुमति के बाद भी किसी भी जिले में नहीं हो सका अब तक निर्माण

भोपाल
आदिवासियों की महुआ शराब को कानूनी मान्यता देने के बाद भी प्रदेश के आबकारी महकमे के अफसर अलीराजपुर, डिंडोरी और खंडवा जिलों में इस शराब का उत्पादन शुरू नहीं करा सके हैं। हेरिटेज शराब के नाम पर इस शराब की अब तक ब्रांडिंग की जा रही है लेकिन यह हेरिटेज शराब प्लांट्स की कमियों और तकनीकी पहलुओं को पूरा नहीं कर पाने में उलझ कर रह गई है। प्लांट के निर्माण में शराब बंदी वाले गुजरात से कई महत्वपूर्ण मशीनों को जुटाने की मशक्कत भी विभाग को करनी पड़ी है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आदिवासियों की परम्परागत महुआ शराब को कानूनी अधिकार देने के लिए नई हेरिटेज शराब पालिसी तैयार कराई है और इसे मंजूरी देने के लिए नियम भी तय कर दिए गए हैं। पहले प्रदेश के आदिवासी बहुल अलीराजपुर और डिंडोरी तथा बाद में खंडवा जिले के आदिवासी बहुल विकासखंड में इससे संबंधित प्लांट लगाने का निर्णय सरकार ले चुकी है लेकिन एक साल से अधिक समय की कोशिश के बाद भी अब तक आदिवासियों की हेरिटेज शराब का निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। इसके लिए अधिकारी प्लांट में लगने वाली आवश्यक मशीनों और अन्य एक्टिविटीज की पूर्ति ही नहीं कर पा रहे हैं।

30 हजार क्विंटल महुआ एकत्र
हेरिटेज शराब बनाने की सरकार की घोषणा के बाद राज्य लघु वनोपज संघ ने अभियान चलाकर प्रदेश से 30 हजार क्विंटल महुआ इकठ्ठा किया है, जिसे शीतगृहों में सुरक्षित रखा गया है ताकि शराब बनाने वालों को कच्चे माल (महुआ) की कमी न हो। शराब बनाने वालों को सरकार मार्केटिंग व पैकेजिंग में भी मदद करेगी। इसके लिए बनाई गई नीति के अनुसार हेरिटेज शराब के लिए लाइसेंस सिर्फ आदिवासी वर्ग के स्वसहायता समूहों को दिया जाएगा। कोई गैर आदिवासी शराब बनाने का कारखाना नहीं लगा सकता है। वहीं देसी शराब से कम दाम नहीं रखे जाएंगे। सरकार वैट सहित स्थानीय स्तर पर कारखानों पर लगने वाले करों में भी छूट दे रही है। हेरिटेज शराब को बढ़ावा देने के लिए वैल्यू ऐडेड टैक्स में 2 साल और एक्साइज ड्यूटी में 6 साल तक की छूट देने का प्रावधान पॉलिसी में किया गया है।

मुहआ के फूलों से बनाने की भी तैयारी
एक्साइज ड्यूटी में छूट के चलते हेरिटेज शराब उत्पादन की लागत में कमी होगी लेकिन शराब की कीमत क्या होगी? यह अब तक तय नहीं किया गया है। इस बीच यह बात भी सामने आई है कि हेरिटेज शराब का निर्माण महुए के फूलों से किया जाएगा। यह दुनिया की एकमात्र शराब है जो फूलों से बनाई जाएगी और पूरे भारत में एकमात्र मध्य प्रदेश में इसका निर्माण किया जाएगा। हेरिटेज शराब बनाने वाले हर स्व सहायता समूह को भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण का सर्टिफिकेट लेना होगा।