उच्च शिक्षा विभाग: शासन से मांगे सवा 51 करोड़ रुपए, राशि के इंतजार में गांव की बेटी

भोपाल
प्रदेश के कॉलेजों में पढ़ रहीं एक लाख छात्राओं को प्रोत्साहन राशि देने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने शासन से सवा 51 करोड़ रुपए मांगे हैं। राशि के अभाव में प्रतिभा किरण और गांव की बेटी स्कीम में दर्ज छात्राओं को काफी परेशानी उठाना पड़ रही है। वे राशि के लिए कोरोना काल में कॉलेजों के चक्कर काट रहे हैं। दोनों स्कीम में छात्राओं 500-500 रुपए प्रतिमाह दिए जाते हैं।

छात्राओं को कॉलेजों में प्रवेश कर डिग्री कराने विभाग ने गांव की बेटी और प्रतिभा किरण स्कीम लागू कर रखी है। विभाग उन्हें प्रोत्साहित करने हर माह 500-500 रुपए के हिसाब से दस माह में 5-5 हजार रुपए देता है। विभाग में सवा लाख छात्राओं ने दोनों स्कीम में पंजीयन कराया था। एक साल पूरा होने के बाद भी करीब एक लाख छात्राओं को राशि नहीं मिल सकी है। इसलिए विभाग ने प्रतिभा किरण में दर्ज छात्राओं को राशि देने सवा करोड़ और गांव की बेटी को राशि देने के लिए पचास करोड़ रुपए की मांग की है। गांव की बेटी में प्रतिभा किरण में ज्यादा छात्राएं दर्ज हैं। राशि के अभाव में छात्राओं को काफी आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ा है। क्योंकि कोरोना काल में छात्राओं के पारिवारिक स्थिति को राहत देने के लिए प्रोत्साहन राशि काफी उपयोगी है।

कॉलेजों में पढने छात्राओं ने अपना गांव छोड़कर शहर में अपना स्थान निर्धारित कर दिखाया है। राजधानी के एमएलबी, एमव्हीएम, भेल, नूतन और गीतांजलि कॉलेज में छात्राओं ने बेहतर रिजल्ट लेने के साथ प्लेसमेंट और अपने बिजनेस शुरू किए हैं। यह स्थिति ग्वालियर, इंदौर और जबलपुर के साथ राज्य के अन्य जिलों की भी है, लेकिन कोरोना काल में कालेज बंद होने से उन्हें अपने गृह जिले में रोका गया है। इसके बाद भी वे राशि लेने शहरों की तरफ बढ़ रही हैं।

छात्रा ग्रामीण निवासी होना अनिवार्य है। 12वीं में 60 फीसदी अंक होने साथ उसका गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन होना जरुरी है। इसके बाद विभाग उसे साल के दस माह 500 रुपए देगा, जो पांच हजार रुपए से ज्यादा नहीं होंगे।

छात्रा को शहर निवासी होने के साथ उसे 12वीं में 60 फीसदी अंक लाना अनिवार्य है। उसे 10 माह तक 500 रुपए प्रतिमाह दिए जाएंगे। वे प्रदेश के किसी भी निजी और सरकारी कॉलेज में प्रवेश ले सकती हैं।