बजट सत्र शुरू: गौतम की अध्यक्षता पर सर्वसम्मति, अटकलों का दौर

भोपाल
विंध्य क्षेत्र के विधायक और भाजपा के वरिष्ठ नेता गिरीश गौतम अंतत: सर्वसम्मति से विधानसभा के नये अध्यक्ष बन गए। सत्रह साल बाद एक बार फिर विधानसभा अध्यक्ष का पद विंध्य के खाते में गया है। आज सुबह सदन समवेत होते ही प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा ने कार्यवाही प्रारंभ की। सबसे पहले उन्होंने विधानसभा के नये अध्यक्ष के निर्वाचन की घोषणा की। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने  भारतीय जनता पार्टी की ओर से विंध्य क्षेत्र के वरिष्ठ भाजपा विधायक गिरीश गौतम का नाम अध्यक्ष पद के लिए प्रस्तावित किया। गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया।  

गिरीश गौतम को विधानसभा का अध्यक्ष चुने जाने को लेकर कांग्रेस ने भी प्रस्ताव रखा। नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ ने भाजपा के विधायकों के प्रस्ताव के बाद गौतम को अध्यक्ष चुने जाने का प्रस्ताव रखा, जिसका कांग्रेस के सीनियर विधायक गोविंद सिंह ने समर्थन किया। इसके बाद गिरीश गौतम सर्वसम्मति से विधानसभा के अध्यक्ष चुने गए।  इसके साथ ही निर्विरोध विधानसभा अध्यक्ष चुने जाने की 42 साल पुरानी परंपरा एक बार फिर कायम हो गई है। गौरतलब है कि पिछली विधानसभा में कांग्रेस की ओर से जब अध्यक्ष पद के लिए एनपी प्रजापति का नाम प्रस्तावित किया गया था। उस समय भाजपा ने विजय शाह को अपना उम्मीदवार घोषित किया था।  

शिवराज सिंह चौहान और कमलनाथ दोनों ने प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा को भी बधाई दी। मुख्यमंत्री ने कहा, लंबे अरसे तक प्रोटेम स्पीकर बनने के लिए इनका नाम गिनीज बुक आॅफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में लिखा जाएगा।

सदन में उपाध्यक्ष का पद कांग्रेस को दिया जाए या नहीं यह अब भाजपा संगठन तय करेगा। कांग्रेस को यह जानकारी लगी है कि भाजपा के विधायकों के साथ ही संगठन की सहमति के बाद ही विपक्ष को उपाध्यक्ष पद दिया जाए या नहीं यह तय होगा। सूत्रों की मानी जाए तो कांग्रेस के कई नेता रविवार रात तक इस लॉबिंग में जुटे रहे कि विधानसभा में उपाध्यक्ष का पद उनकी पार्टी को दिया जाए। इसका असर यह हुआ कि सत्ता पक्ष की ओर से यह संदेश आया कि संगठन और विधायक दल में चर्चा करने के बाद इस पर अंतिम  निर्णय लिया जाएगा। कांग्रेस के पास आए संदेश से साफ है कि आज शाम को होने वाली कांग्रेस-भाजपा विधायक दलों की बैठक में दोनों ही दल उपाध्यक्ष के लेकर अपनी-अपनी रणनीति बनाएंगे।

कांग्रेस ने तय रणनीति के अनुसार ही अध्यक्ष के पद पर कोई उम्मीदवार नहीं खड़ा कर परम्पराओं के निर्वाहन की बात की। अब इसके जरिए वह भाजपा पर यह दबाव बना रही है कि परम्परा अनुसार उसे उपाध्यक्ष का पद दिया जाए।  विधानसभा उपाध्यक्ष के पद को लेकर फिलहाल भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों में अभी संशय की स्थिति बनी है। शाम को मुख्यमंत्री निवास पर होने वाली विधायक दल की बैठक में स्पष्ट हो सकेगा कि उपाध्यक्ष के लिए चुनाव होगा या इसमें भी सर्वसम्मति होगी।