227 युवा बने नवआरक्षक, जिनमें 121 सरेंडर नक्सली

जगदलपुर। 227 नव आरक्षकों के लिए दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया था जिसमें ये सभी बस्तर के अंदरूनी गांवों से बाहर निकलकर पुलिस की नौकरी करने आए हुए थे। 11 माह के कड़े प्रशिक्षण के बाद सभी आरक्षक बन गए हैं। इस दीक्षांत समारोह की एक और खास बात यह है 121 नवआरक्षक ऐसे थे जो पहले नक्सली रह चुके थे या नक्सलियों के लिए काम करते थे। उन्होंने सरेंडर किया और जब इनको पुलिस की सच्चाई पता चली तो सभी ने पुलिस फोर्स ज्वाइन करने की इच्छा प्रकट की। इसके बाद सभी को 11 महीनों तक कड़ा प्रशिक्षण और अनुशासन सिखाया गया। अब ये सभी 121 नव आरक्षक नक्सलवाद के खात्मे के साथ इलाके में शांति स्थापित करने की शपथ ली।

नवआरक्षक बुनयादी प्रशिक्षण केंद्र से 227 आरक्षक बनने वालों में 117 ऐसे थे जो पढ?ा-लिखना भी नहीं जानते थे। इन्हें आरक्षक बनने की ट्रेनिंग के साथ-साथ अफसरों ने अक्षर ज्ञान भी दिया। युवाओं का आत्मविश्वास ही था कि वे पुलिस की ट्रेनिंग के साथ-साथ खुद को साक्षर बनाने की ट्रेनिंग भी ले रहे थे। 11 महीने में ये न सिर्फ साक्षर हो गये बल्कि शस्त्र चलाना भी सीख गये। इन 227 नव आरक्षकों में बस्तर के सातों जिले के युवा शामिल हैं इनमें ऐसे कई युवा हैं जो सरेंडर करने के बाद आरक्षक बने हैं। समर्पण करने वाले युवा काफी अनुभवी हैं। अपने अनुभव से ये नक्सल क्षेत्र में बेहतर काम करेंगे और इसका फायदा भी बस्तर पुलिस को जरुर मिलेगा।