चार विधानसभा और दो संसदीय क्षेत्र में बसा बाइपास का दक्षिणी इलाका विकास से कोसों दूर 

पटना 
विकास की बयार बहाने का दावा करने वाले कई उम्मीदवारों के लिए बाइपास का दक्षिणी इलाका सिर्फ वोट बैंक बनकर रह गया है। चार विधानसभा और दो संसदीय क्षेत्र में बसा बाइपास का दक्षिणी इलाका विकास से कोसों दूर है। चार लाख से अधिक जनसंख्या वाले इलाके में सिर्फ मकान ही मकान दिखेंगे, न अच्छी सड़कें हैं और ना ही नल और नाले हैं। पटना में होकर भी आधा इलाका ग्रामीण क्षेत्र में है और आधा नगर निगम में।

दक्षिणी इलाके में फतुहा, बांकीपुर, कुम्हरार और फुलवारीशरीफ विधानसभा क्षेत्र आता है। इसके अलावा पाटलिपुत्र और पटना साहिब संसदीय क्षेत्र का हिस्सा भी है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में फंसने के कारण कई इलाकों में बिजली का पोल भी नहीं पहुंचा है। बांस-बल्ले के सहारे बिजली पहुंची है। गलियों में नालियां नहीं है। लोग सड़क पर ही घरों का गंदा पानी बहाने को मजबूर हैं।

मतदाताओं का कहना है कि हर चुनाव में उम्मीदवार आते हैं। वोट करने की अपील करते हैं लेकिन सुविधा के नाम पर कुछ नहीं देते हैं। बड़ी आबादी बसती है, लेकिन न तो सरकार की इस इलाके की तरफ कोई नजर होती है और न ही जनप्रतिनिधि की। रामकृष्णा नगर, खेमनीचक, जगनपुरा, नंदलाल छपरा, बेऊर, सिपारा से लेकर कई बड़े मुहल्ले बस गये हैं।

न पार्क, न खेलने का मैदान
बाइपास के दक्षिणी इलाके में न पार्क है और न ही खेलने का कोई मैदान। रामकृष्णा नगर के अर्जुन सिंह बताते हैं कि पिछले 30 साल से सड़क नहीं बनी है। इतना बड़ा इलाका है, फिर भी एक ही थाना है। नंदलाल छपरा में कोई घटना होती है तो पुलिस को पहुंचने में एक घंटा लग जाता है। नया इलाका होने के कारण अपराधियों के छिपने का यह सेफ जोन बन गया है।